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via बुध का सिंह में गोचर

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बुध का सिंह में गोचर

बुध का सिंह में गोचर

सर्वप्रथम सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…

सोमवार 26 अगस्त यानी भाद्रपद कृष्ण एकादशी को बव करण और सिद्धि योग में दिन में दो बजकर सात मिनट के लगभग बुध अपने शत्रु ग्रह चन्द्रमा की कर्क राशि से निकल कर अपने मित्र ग्रह सूर्य की सिंह राशि और मघा नक्षत्र पर गोचर कर जाएगा जहाँ दो मित्र ग्रहों सूर्य तथा शुक्र तथा मंगल भी विराजमान है | बुध इस समय अस्त भी है | सिंह राशि में भ्रमण करते हुए बुध दो सितम्बर को पूर्वा फाल्गुनी तथा नौ सितम्बर को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में ग्यारह सितम्बर को सूर्योदय से लगभग एक घंटा पूर्व पाँच बजे के लगभग अपनी स्वयं की मूल त्रिकोण और उच्च राशि कन्या में प्रविष्ट हो जाएगा | सिंह राशि बुश की मिथुन राशि से तीसरा भाव तथा कन्या से बारहवाँ भाव बनता है तथा सिंह राशि के जातकों के लिए बुध द्वितीयेश और लाभेश हो जाता है | अपनी इस पूरी यात्रा में बुध अस्त ही रहेगा | इन्हीं सब तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं बुध के सिंह राशि में गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये सभी परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका तृतीयेश और षष्ठेश आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | यह गोचर आपकी प्रतियोगी क्षमता में वृद्धि कर रहा है साथ ही आपकी निर्णायक क्षमता में भी स्पष्टता में वृद्धि के संकेत हैं | आप जो भी कार्य करेंगे सोच समझ कर करेंगे | अपने कार्य से सम्बन्धित कोई Short term advance course करने का प्रयास भी आप कर सकते हैं | ऐसा करना आपके कार्य की दृष्टि से लाभदायक सिद्ध हो सकता है | आपके छोटे भाई बहनों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है किन्तु उनके साथ आपका किसी प्रकार का प्रॉपर्टी विषयक विवाद भी सम्भव है | आपकी सन्तान यदि कहीं बाहर है तो वह वापस लौट सकती है |

वृषभ : आपका द्वितीयेश और पंचमेश आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | इस अवधि में आपकी वाणी प्रभावशाली बनी रहेगी और आपकी निर्णायक क्षमता स्पष्ट बनी रहेगी | आर्थिक दृष्टि से तथा कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ संकल्प रहेंगे | परिवार में तथा कार्यस्थल पर सौहार्द का वातावरण बने रहने की सम्भावना है जिसके कारण आप शान्त तथा उत्साहित मन से अपना कार्य समय पर पूर्ण करने में सक्षम हो सकेंगे | किन्तु परिवार में बुजुर्गों से बहस आपके हित में नहीं रहेगी | आपकी सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका लग्नेश तथा चतुर्थेश आपकी राशि से तीसरे भाव में गोचर कर रहा है | भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का विवाद इस अवधि में सम्भव है | किन्तु परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति की मध्यस्थता से आप उस विवाद को सुलझाने में सफल हो सकते हैं | परिवार के अन्य व्यक्तियों का  तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा | यदि आप लेखक हैं तो आपको सिमेनार्स आदि में अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | कोई पुरूस्कार भी आपको प्राप्त हो सकता है | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है |

कर्क : आपके लिए द्वादशेश और तृतीयेश होकर बुध आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है | आपकी वाणी प्रभावशाली रहेगी तथा अपने वाक्चातुर्य से आप अपने सभी कार्य समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | किन्तु वाणी में कुछ तीखापन भी आ सकता है, जिसके कारण विशेष रूप से छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार की अनबन भी हो सकती है, अतः इस ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | इन यात्राओं के कारण एक ओर जहाँ आपको नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण धनलाभ की भी सम्भावना है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

सिंह : आपके लिए द्वितीयेश और एकादशेश होकर बुध का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | आपके लिए कार्य की दृष्टि से यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्धक प्रतीत होता है | आप यदि मीडिया या किसी प्रकार की Alternative Therapy से सम्बन्ध रखते हैं तो आपके लिए आर्थिक लाभ के संकेत हैं | पिता, बड़े भाई, अधिकारियों तथा मित्रों का सहयोग आपको प्राप्त रहेगा और उनके दिशानिर्देशों का पालन करेंगे तो आपके कार्य में निरन्तर प्रगति की सम्भावना है जिसके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं और धनलाभ कर सकते हैं | नौकरी में पदोन्नति तथा मान सम्मान में वृद्धि के भी संकेत हैं | यदि आपकी वाणी में तीखापन आ रहा है तो उसमें सुधार की आवश्यकता है |

कन्या : आपका राश्यधिपति तथा दशमेश बुध आपकी राशि से द्वादश भाव में गोचर कर रहा है | आपका कार्य यदि किसी भी प्रकार से विदेश से सम्बन्ध रखता है तो आपके लिए अत्यन्त भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | विदेश में रहने वाले किसी पुरुष मित्र के माध्यम से आपको कुछ नवीन प्रस्ताव प्राप्त हो सकते हैं | साथ ही आपके पिता का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि के साथ ही नवीन प्रोजेक्ट्स भी आपको प्राप्त होते रहने की सम्भावना है जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ किसी दूर के शहर अथवा विदेश में ट्रांसफर भी हो सकता है | व्यवसाय में पैसा Invest करना पड़ सकता है किन्तु उसके दूरगामी परिणाम लाभदायक हो सकते हैं |

तुला : आपका द्वादशेश और भाग्येश आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है अथवा किसी दूर के शहर से सम्बन्धित है तो आपके लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके लिए विदेश यात्राओं में वृद्धि के योग बन रहे हैं जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती हैं | विदेश में निवास कर रहे किसी मित्र के निमन्त्रण पर भी आप वहाँ जा सकते हैं और उसके माध्यम से आपको कार्य का लाभ हो सकता है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति के साथ ही कहीं दूर ट्रांसफर भी हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि के साथ ही आप किसी धार्मिक कार्य में धन भी व्यय कर सकते हैं |

वृश्चिक : आपका एकादशेश और अष्टमेश दशम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य तथा आय की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो उसमें प्रगति के संकेत हैं | यदि नौकरी में हैं तो उसमें भी पदोन्नति के अवसर प्रतीत होते हैं | नौकरी की खोज में हैं तो वह भी पूर्ण हो सकती है | किसी ऐसे स्थान से भी नौकरी का प्रस्ताव आ सकता है जहाँ पहले मना हो चुकी हो | आपकी वर्तमान परिस्थितियों में इस कार्य को स्वीकार कर लेना आपके हित में रहेगा | बॉस के साथ अकारण ही किसी प्रकार की बहस भारी पड़ सकती है आतः शान्त रहने का प्रयास करें | बड़े भाई अथवा पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

धनु : आपका सप्तमेश और दशमेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपके कार्य तथा आय में वृद्धि की सम्भावना है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति की भी सम्भावना है | सहकर्मियों अथवा व्यावसायिक पार्टनर का और पिता तथा जीवन साथी का सहयोग आपको निरन्तर प्राप्त रहेगा | नौकरी के लिए इन्टरव्यू की तैयारी में हैं तो उसमें भी सफलता प्राप्त हो सकती है | सामाजिक गतिविधियों तथा मान सम्मान में वृद्धि के साथ ही किसी प्रकार का पुरूस्कार अथवा सम्मान आदि भी प्राप्त हो सकता है | आप अपने जीवन साथी के साथ कहीं भ्रमण अथवा तीर्थ यात्रा के लिए भी जा सकते हैं |

मकर : आपका षष्ठेश और भाग्येश आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए उत्साह में वृद्धि का समय है किन्तु इसके साथ ही विरोधियों में भी वृद्धि का समय प्रतीत होता है | किसी कोर्ट केस का परिणाम आपके पक्ष में न आने के कारण अथवा देरी के कारण आप चिन्तित हो सकते हैं | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर बहुत अनुकूल नहीं प्रतीत होता | कार्य आपके अनुकूल न होने के कारण मानसिक तनाव के कारण अनेक समस्याएँ आपको हो सकती हैं | अच्छा यही रहेगा कि इस समय कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय न लें | यदि कहीं यात्रा के लिए जाने का विचार हो तो अभी कुछ समय के लिए स्थगित करना उचित रहेगा |

कुम्भ : पंचमेश और अष्टमेश का गोचर सप्तम भाव में हो रहा है | आपके ज्ञान में वृद्धि का समय है | आप उच्च शिक्षा के लिए भी कहीं बाहर प्रस्थान कर सकते हैं | आपकी सन्तान तथा विद्यार्थियों के लिए भी समय आनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान का सहयोग भी आपको प्राप्त रहेगा | कार्य में उन्नति तथा धनप्राप्ति के भी संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी ये गोचर अघिक अनुकूल प्रतीत होता है | आप इस अवधि में किसी भी प्रकार के विरोध को समाप्त करने में समर्थ हो सकते हैं | वहीं दूसरी ओर आपके जीवन साथी के स्वभाव में कुछ चिडचिडापन आप अनुभव कर सकते हैं | आप स्वयं शान्त रहकर अपने जीवन साथी को भी शान्त करने का प्रयास कर सकते हैं |

मीन : चतुर्थेश और सप्तमेश का गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है | पारिवारिक स्तर पर कुछ समस्याओं अथवा विवादों का सामना इस अवधि में करना पड़ सकता है | जीवन साथी के साथ भी किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित कोई कोर्ट केस भी आपके लिए चिन्ता का विषय हो सकता है | साथ ही जीवन साथी और परिवार के लोगों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

अंत में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/24/mercury-transit-in-leo/

 

इस जीवन को

आज भगवान् श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव है | देश के सभी मन्दिर और भगवान् की मूर्तियों को सजाकर झूले लगाए गए हैं | न जाने क्यों, इस अवसर पर अपनी एक पुरानी रचना यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं, क्योंकि हमारे विचार से मानव में ही समस्त चराचर का साथी बन जाने की अपार सम्भावनाएँ निहित हैं, और यही युग प्रवर्तक परम पुरुष भगवान श्री कृष्ण के महान चरित्र और उपदेशों का सार भी है…

इस जीवन को मैं केवल सपना क्यों समझूँ,
हर भोर उषा की किरण जगाती है मुझको |
हर शाम निशा की बाहों में मुस्काता है
चंदा, तब मादकता छा जाती है मुझको ||
हो समझ रहा कोई, जग मिथ्या छाया है
है सत्य एक बस ब्रह्म, और सब माया है |
पर मैं इस जग को केवल भ्रम कैसे समझूँ
क्षण क्षण कण कण है आकर्षित करता मुझको ||
कल कल छल छल स्वर में गाती है जब नदिया
प्राणों की पायल तब करती ता ता थैया |
पर्वत की ऊँची छोटी चढ़ थकती आँखें
तब मधुर कल्पना कर जाती मोहित मुझको ||
जब कोई भूखा नंगा मिल जाता पथ पर
लगता, खुद ब्रह्म खोजता है मरघट भू पर |
चंचल शिशु तुतलाए नैनों मुझको पढ़ता
जग का नश्वर बन्धन महान लगता मुझको ||
क्या ब्रह्म कभी साथी बन पाया है नर का ?
क्या देख भूख का ताण्डव मन रोया उसका ?
मैं इसी हेतु निज शीश झुकाती मानव को
वह सकल चराचर का साथी लगता मुझको ||

श्री कृष्णाष्टकम्

|| अथ श्री आदिशंकराचार्यकृतम् श्री कृष्णाष्टकं ||

भजे व्रजैक मण्डनम्, समस्तपापखण्डनम्,
स्वभक्तचित्तरञ्जनम्, सदैव नन्दनन्दनम्,
सुपिन्छगुच्छमस्तकम्, सुनादवेणुहस्तकम् ,
अनङ्गरङ्गसागरम्, नमामि कृष्णनागरम् ||१||

मनोजगर्वमोचनम् विशाललोललोचनम्,
विधूतगोपशोचनम् नमामि पद्मलोचनम्,
करारविन्दभूधरम् स्मितावलोकसुन्दरम्,
महेन्द्र मानदारणम्, नमामि कृष्णवारणम् ||२||
कदम्बसूनकुण्डलम् सुचारुगण्डमण्डलम्,
व्रजान्गनैक वल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम्,
यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया,
युतं सुखैकदायकम् नमामि गोपनायकम् ||३||

सदैव पादपंकजं मदीय मानसे निजम्,
दधानमुत्तमालकम्, नमामि नन्दबालकम्,
समस्त दोषशोषणम्, समस्त लोकपोषणम्,
समस्त गोप मानसम्, नमामि नन्द लालसम् ||४||
भुवो भरावतारकम् भवाब्धिकर्णधारकम्,
यशोमतीकिशोरकम्, नमामि चित्तचोरकम्,
दृगन्तकान्तभङ्गिनम्, सदा सदालसंगिनम्,
दिने दिने नवम् नवम् नमामि नन्दसंभवम् ||५||

गुणाकरम् सुखाकरम् कृपाकरम् कृपापरम्,
सुरद्विषन्निकन्दनम्, नमामि गोपनन्दनम्,
नवीनगोपनागरं नवीनकेलिलम्पटम्,
नमामि मेघसुन्दरम् तडित्प्रभालसत्पटम् ||६||
समस्तगोपनन्दनम्, हृदम्बुजैक मोदनम्,
नमामि कुञ्जमध्यगम्, प्रसन्नभानुशोभनम्,
निकामकामदायकम् दृगन्तचारुसायकम्,
रसालवेणुगायकम्, नमामि कुञ्जनायकम् ||७||
विदग्धगोपिका मनो मनोज्ञतल्पशायिनम्,
नमामि कुञ्जकानने प्रवृद्धवह्निपायिनम्.
किशोरकान्तिरञ्जितम, दृगन्जनं सुशोभितम,
गजेन्द्रमोक्षकारणम्, नमामि श्रीविहारिणम् ||८||
यथा तथा यथा तथा तदैव कृष्णसत्कथा,
मया सदैव गीयताम् तथा कृपा विधीयताम्,
प्रमाणिकाष्टकद्वयम् जपत्यधीत्य यः पुमान्,
भवेत् स नन्दनन्दने भवे भवे सुभक्तिमान् ||९||

|| इति श्री आदिशंकराचार्येण विरचितं श्री कृष्णाष्टकं सम्पूर्णम् ||

आदि शंकराचार्य ने बहुत ही सरल भाषा में – जिसे जन साधारण भी सरलता से समझ सके – इस गेय स्तोत्र को रचा है | इस सम्पूर्ण स्तोत्र का भाव तो वास्तव में अत्यन्त गहन दार्शनिक तथा आध्यात्मिकता से ओत प्रोत है | किन्तु संक्षिप्त भावार्थ यही है कि बृजभूमि के एकमात्र आभूषण, समस्त पापों को नष्ट करने वाले तथा अपने भक्तों के चित्तों को आनंदित करने वाले, मोरपंख और वंशी से सुशोभित, काम कला के सागर, कामदेव के भी मान का मर्दन करने वाले, सुन्दर नेत्र, सुन्दर कपोल, सुन्दर अलकों और मधुर मुस्कान तथा चितवन से युक्त, गोवर्धनधारी, समस्त लोकों का पालन करने वाले, भव सागर के कर्णधार, नित्य नूतन लीला रचाने वाले, सूर्य के समान दैदीप्यमान, सुमधुर वेणु बजाकर गान करने वाले तथा सबकी मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाले नन्दनन्दन को हम भक्तियुक्त होकर नमन करते हैं |

भगवान् श्रीकृष्ण सबको मनोकामनाएँ पूर्ण करके कर्मभूमि में अर्जुन की भाँती सभी का मार्गदर्शन करें तथा गोपियों के समान सभी के हृदयों को नि:स्वार्थ प्रेम और सद्भावों से युक्त करें, इसी कामना के साथ सभी को श्री कृष्ण जन्म महोत्सव को अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/08/23/shree-krishnashtakam/