सफलता के सूत्र

via सफलता के सूत्र

Advertisements

सफलता के सूत्र

अपने पिछले लेख “Success – सफलता – के सूत्र” को ही आगे बढ़ाते हैं | सफलता की कामना करना कोई बुरी बात नहीं है | यही कामना व्यक्ति को श्रमशील बनाती है और सफलत कब तथा कैसे प्राप्त हो सकती है – इस विषय में विचार विमर्श करने के लिए व्यक्ति Vedic Astrologers के पास जाता है | उनके द्वारा प्राप्त Career Guidance से निश्चित रूप से एक दिशा निर्देश प्राप्त होता है कि हम किस दिशा में और किस प्रकार के प्रयास करें कि लक्ष्य प्राप्ति में सफलता प्राप्त हो | किन्तु यह सफलता कोई एक दो दिन की बात नहीं होती, यह तो निरन्तर चलते रहने वाली प्रक्रिया होती है | उदाहरण के लिये एक शिक्षक का शिष्य जब परिक्षा में उत्तीर्ण होकर स्वावलम्बी बन जाता है तो वह उस शिक्षक की सफलता होती है | किसी डाक्टर की दवा से रोगी का रोग दूर हो जाता है – यह उस डाक्टर की सफलता है | खिलाड़ी खेलों में मेडल्स जीत कर आते हैं – यह उनके क्रीड़ा कौशल की सफलता है | एक गृहिणी का स्नेह से बनाया भोजन परिवार के लोग रस लेकर ग्रहण करते हैं – यह उस गृहिणी की पाक कला की सफलता है | व्यवसाय में निरन्तर उन्नति प्राप्त करते जाना, नौकरी में निरन्तर पदोन्नति आदि भौतिक सफलताओं के साथ साथ किसी साधक का लक्ष्यसिद्ध हो जाना – यह उस साधक की साधना की सफलता है | इस प्रकार सफलताओं के लिये किसी प्रकार की सीमाओं का निर्धारण नहीं किया जा सकता | किन्तु किसी भी सफलता के लिये कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है |

प्रायः लोग लक्ष्य को जाने बिना ही सफलता की कामना कर बैठते हैं | सर्वप्रथम तो व्यक्ति को उसके लक्ष्य का ज्ञान होना चाहिये | लक्ष्य जब तक निर्धारित नहीं होगा तब तक जीवन में गति नहीं आ पाएगी | लक्ष्य के निर्धारण के बिना व्यक्ति कभी इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये प्रयास करेगा तो कभी उस लक्ष्य के पीछे भागेगा और इसी भागम भाग में न उसे यह लक्ष्य प्राप्त हो पाएगा न वह | सफल व्यक्तियों के पास एक स्पष्ट दृष्टिकोण होता है । वे अँधेरे में तीर नहीं चलाते और इसीलिये उन्हें मार्ग की बाधाओं का ज्ञान भी हो जाता है और समय पर ही समस्याओं का निराकरण करने के लिये तर्कपरक तथा व्यावहारिक प्रयास करते हैं |

दूसरा चरण है लक्ष्य के प्रति एकाग्रता का भाव | कितने भी आकर्षण हों, कितनी भी बाधाएँ मार्ग में खड़ी हों, अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित तथा एकाग्रचित्त रहे | हर समय बस उस लक्ष्य की ओर ही ध्यान रहे | समर्पण की भावना से लगन एवं उत्साह उत्पन्न होता है और लक्ष्य में दृढ़ता उत्पन्न होती है | जब ऐसा हो जाएगा तो निश्चित रूप से लक्ष्य प्राप्ति के लिये किये गए प्रयास फलप्रद होंगे |

किन्तु लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित्त होने के बाद भी उसकी प्राप्ति के लिये प्रयास किस प्रकार के किये जाएँ – इसका ज्ञान भी आवश्यक है | और इसके लिये आवश्यकता होती है सही मार्गदर्शन की | एक उत्तम मार्गदर्शक की | उत्तम गुरु की | गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति हो ही नहीं सकती, और ज्ञान के बिना किसी भी कार्य में सफलता के विषय में सोचा भी नहीं जा सकता | एक ऐसा गुरु जिसे स्वयं उस विषय का समुचित ज्ञान हो और शिष्य को उसकी गलतियों से परिचित कराके उसे किसी भी प्रकार के लोभ से रहित होकर पुत्रवत तथा मित्रवत दिशानिर्देश दे सके |

गुरु के दिशा निर्देश से व्यक्ति को स्वयं के विषय में जानने में सहायता प्राप्त होगी | गुरु की सहायता से व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य का ज्ञान होगा और उसी के अनुरूप प्रयास करके सफलता की ओर अग्रसर हो सकेगा |

इस सबके साथ साथ, कार्य करते समय व्यक्ति को अपने मन से हार उपहास आदि के अज्ञात भयों को भी दूर भागना होगा | व्यक्ति को सफलता और असफलता दोनों को समान भाव से ग्रहण करना चाहिये | तभी उसके मन में कार्य के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव आएगा और तब उसे सफलता प्राप्ति से कोई रोक नहीं सकेगा | जीत अथवा सफलता सुनिश्चित करनी है तो असफलता की सम्भावना को ही समाप्त कर देना होगा । सफलता प्राप्ति के प्रयास में महत्वपूर्ण है कि उन कारकों को पहचानकर उन्हें मूल से समाप्त कर दिया जाए जिनके कारण असफलता आ सकती है । फिर भी यदि ऐसा होता है तो उस असफलता से विचलित न होकर उससे शिक्षा ग्रहण की जाए ताकि भविष्य में उचित प्रयास किया जा सके |

इस सबके साथ साथ लक्ष्य की प्राप्ति के प्रति प्रयासरत रहते हुए व्यक्ति को सदा प्रसन्नचित्त रहना चाहिये | तभी वह अपनी क्षमताओं का उचित उपयोग कर पाएगा तथा सकारात्मकता बनी रहेगी | साथ ही यह भी ध्यान में रखना आवश्यक है कि जितनी कार्य कुशलता, जितना दृढ़ संकल्प और जितना अधिक श्रम सफलता प्राप्त करने के लिये आवश्यक है उतनी ही कार्य कुशलता, उतना ही दृढ़ संकल्प तथा उतना ही अधिक श्रम उस सफलता को स्थाई रखने के लिये भी आवश्यक होता है |

हम सभी कर्मरत रहते हुए अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर रहें तथा जीवन में सफलता प्राप्त करें…

 

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/02/18/tips-for-success/

 

Success

सफलता के सूत्र

कुछ महीने पहले की बात है | एक महिला अपने पुत्र के साथ मेरे पास आईं | पिछले कई वर्षों से वे मेरे पास सलाह लेने आती रहती हैं | कभी अपने लिये, कभी अपने पति के व्यवसाय के सम्बन्ध में, कभी किसी अन्य बात के लिये | इस बार वे आई थीं कि उनका पुत्र अपने कार्यक्षेत्र में कड़ी मेहनत कर रहा है फिर भी उसे प्रमोशन न मिलकर दूसरे लोगों को मिलता जा रहा है, जो कि उतनी मेहनत भी नहीं करते और योग्यता में भी उनके पुत्र से कमतर ही हैं | उनके पुत्र का भी यही कहना था | जिस नौकरी में उनका पुत्र है वहाँ उसे बहुत अच्छी तनखाह मिल रही है और पद भी काफ़ी सम्मान जनक मिला हुआ है | लेकिन फिर भी वह सन्तुष्ट नहीं है अपनी नौकरी से | नौकरी उसी क्षेत्र में है जिसकी योग्यता उसने एक बहुत अच्छा और मँहगा कोर्स करके प्राप्त की थी | लेकिन अब उसे अपने चचेरे भाई का काम कहीं अधिक अच्छा लगता है | उसका कहना है कि जो कोर्स उसने किया उसमें कभी भी उसकी रूचि नहीं थी किन्तु माता पिता के आग्रह के कारण उसे वह वह कोर्स करना पड़ा | और यही कारण है कि वह अपने वर्तमान कार्य पर उतनी निष्ठा से ध्यान नहीं दे पा रहा है |

वे महिला मेरे पास career consultation हेतु Horoscope Reading के लिए आई थीं और उनका आग्रह था कि कोई सलाह दूँ और कोई उपाय बताऊँ | उसका Horoscope का अध्ययन करके जो कुछ भी मैं बता सकती थी बता दिया | कुछ महीनों के बाद उनके पुत्र का ही फोन आया कि जो कुछ मैंने करने की सलाह दी थी वो सब उसने किया और अभी पिछले सप्ताह उसका Promotion हुआ है |

जीवन में प्रत्येक व्यक्ति कर्म करता है और अपने उस कर्म में सफलता प्राप्ति की कामना भी स्वाभाविक रूप से करता ही है | कुछ लोग चाहते हैं की उनके पास अच्छा घर हो, बंगला हो, अपनी खुद की कारें हों, बैकं बैलेंस हो इत्यादि इत्यादि… प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बनाना की इच्छा रखता है | और इस सबकी प्राप्ति के लिए वह हर सम्भव प्रयास भी करता है | जी तोड़ मेहनत करता है | उसके बाद भी यदि सफलता नहीं मिलती तो आप लोग ज्योतिषियों के पास जाते हैं | उनसे आपको एक उचित दिशा निर्देश भी प्राप्त होता है | बड़ी अच्छी बात है | लेकिन एक बात हमेशा याद रखियेगा कि उचित दिशा में किये गए कर्म से बढ़कर और कोई उपाय नहीं है सफलता प्राप्ति का |

एक Vedic Astrologer अपने ज्ञान और अनुभव की सीमाओं में रहकर आपका यही मार्गदर्शन कर सकता है कि आप किस प्रकार से प्रयास कीजिए | आपको सफलता प्राप्ति के सूत्रों के विषय में जानकारी दे सकता है | साथ ही इस दिशा में भी मार्गदर्शन कर सकता है कि जो कार्य आप करने जा रहे हैं उससे सम्बन्धित योग्यता, प्रयास करने की क्षमता और लगन इत्यादि आपमें है या नहीं, और यदि नहीं है तो किस प्रकार आप इस सबमें पारंगत हो सकते हैं | कर्म तो आपको ही करना होगा |

हम सभी कर्मरत रहते हुए अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर रहें तथा सफलता प्राप्त करें…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/02/17/success/