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सूर्य का मिथुन में गोचर

सूर्य का मिथुन में गोचर

आज सायं पाँच बजकर उन्तालीस मिनट के लगभग भगवान भास्कर अपने शत्रु गृह शुक्र की वृषभ राशि से निकल कर बुध की मिथुन राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे, जहाँ उनके लिए विचित्र परिस्थिति बनी हुई है | एक ओर उनका मित्र ग्रह मंगल वहाँ गोचर कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर एक शत्रु ग्रह राहु का गोचर भी वहाँ चल रहा है | साथ ही शनि और केतु इन दो शत्रु ग्रहों की दृष्टियाँ भी मिथुन राशि पर हैं | मिथुन राशि सूर्य की अपनी राशि सिंह से एकादश और सूर्य की उच्च राशि मेष से तीसरे भाव में आती है | आत्मा का कारक सूर्य इस समय मृगशिर नक्षत्र पर हैं, तथा यहाँ से 22 जून को आर्द्रा, 6 जुलाई को पुनर्वसु नक्षत्रों पर भ्रमण करते हुए अन्त में 17 जुलाई को सूर्योदय से कुछ पूर्व 4:34 के लगभग कर्क राशि में प्रस्थान कर जाएँगे | सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश के समय गर करण और सिद्ध नक्षत्र होगा | पृथिवी तत्त्व युक्त मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल सूर्य का मित्र ग्रह है तथा यह समानान्तर चलने वाला पित्त प्रकृति का धैर्यवान नक्षत्र है | आर्द्रा ऊर्ध्वमुखी तीक्ष्ण और वात प्रकृति का जल तत्त्व युक्त स्त्री नक्षत्र है तथा राहु इसका देवता है | पुनर्वसु सहनशील तथा रचनाधर्मिता युक्त समानान्तर चलने वाला वात प्रकृति का सात्विक चर पुरुष नक्षत्र है और इसका देवता है गुरु | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं कि मिथुन राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन कराया जाना आवश्यक है |

मेष : आपका पंचमेश आपकी राशि से तीसरे भाव में प्रवेश करेगा | आपके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपके तथा आपके भाई बहनों के लिए कार्य में उन्नति के योग हैं | आर्थिक स्थिति में दृढ़ता के संकेत हैं | किसी घनिष्ठ मित्र अथवा भाई बहनों के सहयोग से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रहते हुए अर्थलाभ भी कर सकते हैं | किन्तु आलस्य का त्याग करके अधिक श्रम तथा प्रयास करने की आवश्यकता है | साथ ही भाई बहनों के साथ व्यर्थ के विवाद की सम्भावना को भी नकारा नहीं जा सकता | आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं |

वृषभ : आपकी राशि से चतुर्थेश का गोचर आपके द्वितीय भाव में हो रहा है | प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में लाभ की आशा की जा सकती है | यदि आप अपने लिए नई प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो आपका वह सपना भी पूर्ण हो सकता है | किन्तु सम्बन्धित Documents का भली भाँती निरीक्षण आवश्यक है | साथ ही आत्मविश्वास में वृद्धि के भी संकेत हैं | किन्तु माइग्रेन, ज्वर, पित्त आदि से सम्बन्धित समस्याएँ हो सकती हैं अतः गर्मी से बचने का प्रयास करें और अधिक मात्रा में पेय पदार्थों का सेवन करें |

मिथुन : आपकी राशि से तृतीयेश का गोचर आपकी लग्न में हो रहा है | भाई बहनों के साथ सम्बन्धों में प्रगाढ़ता के संकेत तो हैं किन्तु साथ ही किसी बात पर कोई विवाद भी उत्पन्न हो सकता है जिसके कारण आपको किसी प्रकार का मानसिक कष्ट भी हो सकता है | अतः किसी भी विवाद को बढ़ने न देने का प्रयास करना आपके हित में होगा | साथ ही यदि आपने अपने Temperament को नियन्त्रण में नहीं रखा तो वैवाहिक जीवन में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है |

कर्क : आपके द्वितीयेश का गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है | आपको कार्य के सिलसिले में विदेश यात्राएँ करनी पड़ सकती हैं | इन यात्राओं में एक ओर जहाँ अर्थलाभ की आशा की जा सकती है वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है – विशेष रूप से आँखों के इन्फेक्शन के प्रति सावधान रहें | खर्च में वृद्धि की भी सम्भावना है, अतः बजट बनाकर चलेंगे तो आपके लिए हित में रहेगा | पिता के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

सिंह : आपके राश्यधिपति का आपके लाभ स्थान में गोचर कर रहा है, वास्तव में आपके कार्य तथा आर्थिक दृष्टि से बहुत अच्छे संकेत प्रतीत होते हैं | नवीन प्रोजेक्ट्स आपको प्राप्त हो सकते हैं जो लम्बे समय तक आपको व्यस्त रखते हुए धनलाभ कराने में सक्षम होंगे | साथ ही नौकरी में प्रमोशन, मान सम्मान में वृद्धि तथा व्यवसाय में उन्नति के भी संकेत हैं | कोई नया कार्य भी आप इस अवधि में आरम्भ कर सकते हैं | परिवार, मित्रों, बड़े भाई, पिता तथा अधिकारियों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा | आपकी सन्तान के लिए भी अनुकूल समय प्रतीत होता है |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके कर्म स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से कार्य की दृष्टि से समय अत्यन्त उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | यदि आपके कार्य का सम्बन्ध विदेशों से है तब तो आपके लिए विशेष रूप से उत्साहवर्द्धक समय प्रतीत होता है | साथ ही कार्य से सम्बन्धित विदेश यात्राओं में वृद्धि की भी सम्भावना है | विदेश में निवास कर रहे आपके मित्रों की ओर से आपको सहयोग प्राप्त हो सकता है | किन्तु अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता होगी |

तुला : आपका एकादशेश आपके भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | निश्चित रूप से भाग्योन्नति का समय प्रतीत होता है | सुख समृद्धि में वृद्धि के संकेत हैं | जिन जातकों का कार्य विदेश से किसी प्रकार सम्बद्ध है उनके लिए विशेष रूप से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | विदेश यात्राओं में वृद्धि के भी संकेत हैं | अतः अवसर का लाभ उठाने की आवश्यकता है | यदि स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या चल रही है तो उससे भी मुक्ति इस अवधि में सम्भव है |

वृश्चिक : आपकी राशि से दशमेश आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक दृष्टि से तो समय अनुकूल है किन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से समय उतना अनुकूल नहीं प्रतीत होता | गुप्त शत्रुओं के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है | स्वास्थ्य समस्याओं तथा विरोधियों के कारण आप अपने मनोबल में भी कमी का अनुभव कर सकते हैं |

धनु : आपका भाग्येश आपके सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए कार्य की दृष्टि से समय अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में उन्नति के संकेत हैं | जो लोग पॉलिटिक्स से जुड़े हैं उनके लिए भी समय उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | किन्तु दाम्पत्य जीवन तथा प्रेम सम्बन्धों के लिए समय अनुकूल नहीं प्रतीत होता | आपके जीवन साथी अथवा प्रेमी / प्रेमिका के उग्र स्वभाव के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है | अपने व्यवहार को सन्तुलित रखने के लिए प्राणायाम और ध्यान का सहारा लीजिये |

मकर : आपका अष्टमेश छठे भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर विदेश यात्राओं के योग हैं तो वहीं दूसरी ओर कार्य की दृष्टि से समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप इस समय अपने प्रतियोगियों को परास्त करने में सक्षम हैं इसलिए अवसर का लाभ उठाकर अपने लक्ष्य के प्रति अग्रसर होना ही उचित रहेगा | स्वास्थ्य की दृष्टि से भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी इस अवधि में ठीक हो जाने की सम्भावना है |

कुम्भ : आपका सप्तमेश आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर कर रहा है | आपके लिए सूर्य का यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | व्यावसायिक रूप से आपके कार्य में तथा मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान के लिए विशेष रूप से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा के लिए विदेश भी जा सकती है और यदि नौकरी की तलाश में है तो वह भी पूर्ण हो सकती है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है |

मीन : षष्ठेश का चतुर्थ भाव में गोचर है | आप अथवा आपका जीवन साथी यदि नया वाहन अथवा घर खरीदना चाहते हैं तो अभी उस विचार को स्थगित करना ही उचित रहेगा | साथ ही परिवार में किसी प्रकार का मनमुटाव भी हो सकता है अतः सावधान रहने की आवश्यकता है | किन्तु नौकरी में पदोन्नति के संकेत हैं | पॉलिटिक्स में हैं तो आपको कोई पद भी प्राप्त हो सकता है | मान सम्मान में वृद्धि के संकेत हैं | यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा है तो वह आपके पक्ष में आ सकता है | परिवार में किसी बच्चे का जन्म भी हो सकता है |

अन्त में जैसा सदा लिखते हैं, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2019/06/15/sun-transit-in-gemini/

 

 

अहम् ब्रह्मास्मि

मंज़िल का भान हो न हो / पथ का भी ज्ञान हो न हो

आत्मा – हमारी अपनी चेतना / नित नवीन पंख लगाए

सदा उड़ती ही जाती है / सतत / निरन्तर / अविरत…

क्योंकि मैं “वही” हूँ / मेरे अतिरिक्त और कुछ भी नहीं

“अहम् ब्रह्मास्मि” या कह लीजिये “सोSहमस्मि”

तभी तो, कभी इस तन, कभी उस तन

कभी तेरे तन तो कभी मेरे तन |

न इसके पंख जलते हैं भयंकर ताप से

न ये गलते हैं अनवरत बरखा के पानी से

और न ही ये सिकुड़ते हैं तेज़ सर्द हवाओं से |

इन डैनों को फैलाए आत्मा – हमारी अपनी चेतना

उड़ती जाती है विशाल ब्रह्माण्ड में / सतत / निरन्तर / अविरत…

कितनी दूर अभी जाना है / कहाँ रुकना है

नहीं ज्ञान इसे / बस ज्ञान है तो इतना

कि फैलेँगे पंख जितने विशाल / ऊँची होगी उतनी उड़ान |

प्रत्यक्ष की इस जीवन यात्रा में

आत्मा – हमारी अपनी चेतना

बस उड़ती ही रहती है / सतत / निरन्तर / अविरत…

थकते नहीं कभी / कमज़ोर पड़ते नहीं कभी पंख इसके

हाँ, ठहर ज़रूर जाते हैं कुछ पलों के लिए

क्योंकि आ जाते हैं व्यवधान राहों में |

कभी मार्ग रोकता है क्रोध

लेकिन साथ ही प्रेम दिखा देता है नया मार्ग |

कभी मार्ग रोकते हैं भय और कष्ट

तो साथ ही पुरुषार्थ खोल देता है नई राहें |

कभी उन फैले पंखों से पहुँचता है कष्ट किसी को

तो क्षमादान प्रशस्त करता है एक नया मार्ग |

कभी होता है अभिमान एक पंख को अपने विस्तार का

तो दूसरा पंख एक ओर झुककर / प्रशस्त करता है मार्ग विनम्रता का |

एक पंख के साथ होता है रुदन

तो दूसरा हँसकर उसे पहुँचाता है सुख |

कभी दोनों ही पंख होते हैं उपेक्षित

तो कभी दोनों को मिलता है सम्मान अपार |

यही क्रम है सृष्टि का – संसार चक्र का

आत्मा – हमारी अपनी चेतना

अनेक प्रकार के पंख लगाए

बस उड़ती जाती है अपने ही विशाल विस्तार में

सतत / निरन्तर / अविरत……..

तो आइये आज दे दें अपनी आत्मा को पंख उन्मुक्त प्रेम के

भर दें इन पंखों में माधुर्य क्षमा का

पुरुषार्थ से कर दें इन पंखों को बलिष्ठ

हवा भर दें इन पंखों में विनम्रता की

ताकि उड़ती रहे आत्मा – हमारी अपनी चेतना

अपने ही विशाल विस्तार में / सतत / निरन्तर / अविरत / अनवरत……