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गुरु का मकर में गोचर

आज जब सारा विश्व कोरोना वायरस के आक्रमण से जूझ रहा है ऐसे में कुछ लोगों का आग्रह कि गुरु के मकर राशि में गोचर के सम्भावित परिणामों के विषय में लिखें – हमें हास्यास्पद लगा | किन्तु फिर भी, मित्रों के अनुरोध पर प्रस्तुत है गुरुदेव के मकर राशि में गोचर के सम्भावित परिणामों पर एक दृष्टि |

सोमवार 29 मार्च 2020, चैत्र शुक्ल षष्ठी को 27:55 (अर्द्धरात्र्योत्तर तीन बजकर पचपन मिनट) के लगभग आयुष्मान योग और कौलव करण में गुरुदेव अपनी स्वयं की धनु राशि से निकल कर शनि की मकर राशि में प्रविष्ट हो जाएँगे | मकर राशि में इस समय शनि स्वराशि में तथा मंगल अपनी उच्च राशि में भ्रमण कर रहे हैं | गुरु इस समय उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर है | एक ओर यहाँ आकर देवगुरु बृहस्पति गुरु-चाण्डाल योग यानी राहु-केतु से मुक्त हो जाएँगे तो वहीं दूसरी ओर अपनी नीच की राशि में राश्यधिपति के साथ पहुँच जाएँगे – जिनके साथ न इनकी मित्रता है न ही शत्रुता | मकर में ही गुरु का मित्र मंगल भी गोचर कर रहा है और चार मई तक वहीं भ्रमण करेगा | मकर अंगारक मंगल की उच्च राशि है जिसके कारण मंगल की उग्रता में और अधिक वृद्धि होने की सम्भावना है | ऐसे में सम्भव है मंगल से सम्बन्धित ज्वर, पित्त तथा रक्त विकार जैसी समस्याओं में तेज़ी आ जाए |

मकर राशि में भ्रमण करते हुए चौदह मई 2020 को रात्रि 7:47 के लगभग गुरु वक्री होना शुरू हो जाएगा और तीस जून 2020 को सूर्योदय से पूर्व पाँच इक्कीस के लगभग वापस अपनी राशि धनु में पहुँच जाएगा | तेरह सितम्बर 2020 को प्रातः 6:35 के लगभग धनु राशि में ही मार्गी होता हुआ 20 नवम्बर 2020 को दिन में 13:24 के लगभग पुनः मकर राशि में आ जाएगा | 11 जनवरी 2021 से 12 फरवरी 2021 तक गुरु अस्त भी रहेगा | मकर, धनु और पुनः मकर राशि में विचरण करने की अवधि में गुरु 29 मार्च 2020 से उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर भ्रमण करेगा | उसके बाद वक्री चाल में 26 जुलाई को वापस पूर्वाषाढ़ नक्षत्र पर आ जाएगा | जहाँ से तीस अक्तूबर से पुनः उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर, सात जनवरी 2021 से श्रवण नक्षत्र पर तथा पाँच मार्च 2021 से धनिष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में 5/6 अप्रैल 2021 को अर्द्धरात्रि में 00:25 के लगभग शनि की दूसरी राशि कुम्भ में प्रविष्ट हो जाएगा |

मकर राशि के लिए गुरु तृतीयेश और द्वादशेश है | गुरु की एक राशि धनु के लिए मकर राशि द्वितीय भाव है तथा दूसरी राशि मीन के लिए मकर राशि एकादश भाव है | मकर राशि में विचरण करते हुए गुरु की दृष्टियाँ क्रमशः वृषभ राशि, कर्क राशि तथा तुला राशियों पर रहेंगी | इनमें से वृषभ राशि के लिए गुरु अष्टमेश तथा एकादशेश है, कर्क के लिए षष्ठेश तथा भाग्येश है और तुला राशि के लिए गुरु तृतीयेश तथा षष्ठेश है |

ये “शिवविंशति” अर्थात भगवान शिव के सम्वत्सरों का युग चल रहा है और इस कड़ी में अभी तक परिधावी सम्वत्सर चल रहा था, जिसके कारण वर्षा में कमी के कारण महँगाई में वृद्धि और रोगों तथा अन्य प्रकार के उपद्रवों में वृद्धि की सम्भावना की जाती है | अब 25 मार्च से नव सम्वत्सर का आरम्भ हो जाएगा, जिसका नाम होगा प्रमादी तथा अश्विनी कुमारों को इस सम्वत्सर का देवता माना गया है | आयुर्वेदाचार्य अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य तथा समस्त प्रकार के दुःख दारिद्र्य को दूर करके सुख सौभाग्य और स्वास्थ्य प्रदान करने वाले माने जाते हैं | इस वर्ष का राजा होगा बुध और मन्त्री चन्द्रमा | सूर्योदय प्रातः 6:19 पर होगा और इस समय मीन लग्न तथा लग्न में सूर्य और चन्द्र दोनों विराजमान होंगे और चन्द्रमा रेवती नक्षत्र पर होगा | इस प्रकार देखा जाए तो यह संयोग अत्यन्त शुभ रहने की सम्भावना है | यही नहीं यह संयोग आर्थिक विकास, विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में उन्नति, सामाजिक व्यवस्था और स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में बहुत अनुकूल सिद्ध हो सकता है |

किन्तु, जैसा कि ऊपर लिखा है, गुरुदेव 28 को अपनी नीच राशि मकर में प्रस्थान कर जाएँगे | यदि सामान्य रूप से देखें तो प्रमादी नाम के सम्वत्सर में प्रजा में आलस्य में वृद्धि तो मानी जाती है लेकिन रोग व्याधि आदि से धीरे धीरे मुक्ति भी मानी जाती है | साथ ही अभी तक गुरुदेव गुरु-चाण्डाल योग में थे और अब नीच की राशि में राश्यधिपति शनि तथा उच्च के अंगारक के साथ पहुँच जाएँगे | चार मई को मंगल यहाँ से निकल कर कुम्भ में पहुँचेगा और तीस जून से गुरु वक्री होकर धनु में जाने लगेगा | इस आधार पर हम कह सकते हैं कि पूरा अप्रैल जब तक मंगल मकर में रहेगा – कोरोना के मामलों में वृद्धि हो सकती है और तीस जून से परिस्थितियों में सुधार की सम्भावना की जा सकती है | किन्तु फिर बीस नवम्बर से पाँच अप्रैल 2021 तक गुरु वापस मकर में लौट जाएगा | उस समय हो सकता है फिर से यह बीमारी सर उठाए |

लेकिन, जैसा कि सदा कहते आए हैं, ज्योतिष सम्भावनाओं का विज्ञान है | हज़ारों वर्ष पूर्व लिखे गए सूत्रों को नवीन परिस्थितियों के साथ अध्ययन करके तथा व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर ज्योतिषी कुछ फल कथन करते हैं और इन सभी फल कथनों का उद्देश्य होता है केवलमात्र मार्गदर्शन – इसे ब्रह्म वाक्य समझ कर नहीं बैठ जाना चाहिए | इसे हम इस प्रकार समझ सकते हैं कि हमें पहले से बता दिया जाता है कि जहाँ हमें पहुँचना है वहाँ के मार्ग में बहुत बड़ी खाई है और हम उसमें गिरकर चोट खा सकते हैं तो उस स्थिति में हम सँभल कर चलेंगे ताकि गिरने का भय न रहे, या यदि गिर भी जाएँ तो उतनी अधिक चोट न लग सके जितनी अचानक से गिरने में लग सकती थी | किन्तु यदि हमें उस खाई का पहले से पता ही नहीं होगा तो निश्चित रूप से हम ऐसे गिरेंगे की संभलना मुश्किल हो जाएगा | और वर्तमान में कोरोना जैसे खाई से बचने का एक ही उपाय है कि इससे घबराए बिना डॉक्टर्स के बताए दिशा निर्देशों का पालन करें और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए जितना सम्भव हो घरों के भीतर रहें, बार बार अपने हाथों को अच्छी तरह धोते रहें, बाज़ार से लाई दूध की थैली आदि को भी साबुन से धोने के बाद ही प्रयोग करें, सब्ज़ी लाने के बाद भी पहले उन्हें भली भाँति धोकर साफ़ कर लें उसके बाद ही उनको काम में लाएँ… इत्यादि इत्यादि…

सरकारों द्वारा लगभग सभी राज्यों को Lockdown कर दिया गया है – यानी सीमाओं को सील कर दिया गया है और जन साधारण से अपील की गई है कि बहुत ही आवश्यक हो तभी घरों से बाहर निकलें | हमें स्वयं ही कड़ाई से इस Lockdown को सफल बनाने के लिए सरकार को सहयोग देना चाहिए | यदि हम अपने व्यक्तिगत स्वार्थों तथा कुछ समय की समस्याओं (जो कि वास्तव में हैं नहीं – क्योंकि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बन्द नहीं की गई है) को भुलाकर इस प्रकार के दिशा निर्देशों का पालन दृढ़ संकल्प, पूर्ण मनोयोग और पूरी ज़िम्मेदारी के साथ करते रहे तो निश्चित रूप से हम कोरोना की इस खाई से बाहर निकल आने में सफल हो सकेंगे, और धीरे धीरे इस संक्रमण पर जन साधारण की विजय होगी और ज्योतिष वर्ग द्वारा जो सम्भावना व्यक्त की गई है कि अभी कुछ समय के लिए कोरोना से संक्रमित मरीज़ों की संख्या में वृद्धि हो सकती है वह सम्भावना सम्भावना बनकर ही रह जाएगी और सभी राशियों के लिए गुरु का मकर में गोचर शुभ देने वाला सिद्ध हो सकेगा…

तो संकल्प लें कि हमें कोरोना को हराना है पूर्ण साहस और समझदारी के साथ… इसी संकल्प और कामना के साथ कल से प्रारम्भ करेंगे गुरु के मकर राशि में गोचर के सभी बराह राशियों पर होने वाले सम्भावित प्रभावों की संक्षिप्त समीक्षा…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/03/23/jupiter-transit-in-capricorn/

 

23 मार्च से 29 मार्च तक का साप्ताहिक राशिफल

सभी के लिए 23 मार्च से 29 मार्च तक का साप्ताहिक राशिफल

इन दिनों सारा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, ऐसे में सभी का सारे काम रुके हुए हैं | सबसे पहली आवश्यकता है इस महामारी से मुक्ति प्राप्त करने की, न कि अपने कार्य अथवा किसी अन्य विषय में सोचने विचारने की | हम सभी आत्म संयम का परिचय दें और घर से बाहर तभी निकलें जब कोई आवश्यक कार्य हो | “सोशल डिस्टेंसिंग” यानी समाज में एक दूसरे से परस्पर यथा सम्भव दूरी बनाए रखना तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना अत्यन्त आवश्यक है | सम्भव है आपको इस अवधि में कोई नवीन प्रोजेक्ट प्राप्त हो भी जाए, लेकिन कार्य तो मनुष्य जीवन भर करता रहता है और अर्थ प्राप्ति भी जीवन भर चलती रहती है, अतः अभी यदि कोई नवीन प्रोजेक्ट प्राप्त हो भी रहे हों तो उन पर ध्यान देने की अपेक्षा उचित यही रहेगा कि आपके घरों में बैठकर इस बीमारी को फैलने से रोकने का प्रयास करें |

ज्योतिष के विद्वान इस महामारी के विषय में बहुत सी भविष्यवाणियाँ कर रहे हैं, बहुत से प्राचीन ग्रन्थों के सन्दर्भ प्रस्तुत कर रहे हैं | हमारा प्रश्न केवल मात्र यही है कि जिन प्राचीन ग्रन्थों से उद्धरण प्रस्तुत किये जा रहे हैं वो समय रहते क्यों नहीं प्रस्तुत किये गए ? यदि पहले से ये सब देख लिया होता तो इस प्रकार से ये वायरस इतना अधिक भयावह रूप न ले पाता |

कुछ लोग कहेंगे कि अभी तक गुरुदेव राहु-केतु के बीच फँसे हुए थे और शनिदेव अभी कुछ समय पहले वहाँ से निकल कर अपनी स्वयं की राशि में आए हैं | यहाँ आते ही उनके प्रकोप का सामना करना पड़ा | कुछ लोग ऐसा भी बोल सकते हैं कि गुरु का प्रवेश नीच की राशि मकर में हो गया है और तीस जून तक जब तक कि वक्री होकर वापस से धनु में नहीं पहुँच जाता तब तक इस आपत्ति से मुक्ति सम्भव नहीं क्योंकि अभी अंगारक मंगल भी अपनी उच्च राशि में जाकर बल प्राप्त कर रहा है तथा गुरु और शनि के साथ युति कर रहा है, और चार मई को जब मंगल यहाँ से निकल जाएगा तब इस बीमारी में कमी आनी आरम्भ होगी, इसकी कोई औषधि उस समय तक प्राप्त हो जाएगी और तीस जून आते आते सब कुछ धीरे धीरे सामान्य होना आरम्भ हो जाएगा | धीरे धीरे इसलिए कि शनि का समय भी चल रहा है | इस प्रकार की बहुत सी सम्भावनाओं पर हमारे ज्योतिषी कार्य कर रहे हैं | किन्तु जब तक कोई परिणाम नहीं प्राप्त हो जाते तब तक सब कुछ केवल अनुमान मात्र ही हैं | वैसे भी हम सदा बोलते आए हैं कि ज्योतिष सम्भावनाओं का विज्ञान है |

इसीलिए हमारा मानना है कि इस समय व्यक्तिगत राशिफल की ओर ध्यान दिए बिना और किसी भी प्रकार के अन्धविश्वास का शिकार हुए बिना मिलकर स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए कुछ समय के लिए शान्त बैठकर इस वायरस को हराने का प्रयास करें | इसे आप इस प्रकार समझिये कि कोई जहाज़ समुद्र में डूब जाता है तो क्या ये मान लिया जाए कि उस दिन सारे के सारे यात्रियों का मारक योग था ? या फिर ऐसा कि आपकी राशि के लिए ग्रहों का गोचर कार्य की दृष्टि से भी, अर्थ की दृष्टि से भी और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत अनुकूल चल रहा हो, किन्तु वायरस को फैलने से रोकने के लिए आप कहीं आ जा नहीं सकें तो ग्रहों के गोचर आपके लिए अनुकूल होते हुए भी कोई फल कैसे दे पाएँगे ?

सत्य तो यही है कि प्राकृतिक आपदाओं के समक्ष सारे राशिफल व्यर्थ हो जाते हैं | इसलिए यह समय है आत्मावलोकन का और आत्म संयम का | किसी भी वायरस के प्रकोप से भयभीत हुए बिना संयम के साथ अपने मन में इस प्रकार का संकल्प लें कि इस महामारी को दूर भगाएँगे और इस प्रकार की कल्पना करें कि विश्व इससे मुक्त हो चुका है – वास्तव में इस सामूहिक संकल्प और सामूहिक कल्पना का प्रभाव पड़ेगा | क्योंकि हमारे दृढ़ता के साथ लिए गए संकल्प और हमारी पूर्ण मनोयोग से की गई कामनाएँ और कल्पनाएँ ही मूर्त रूप लेती हैं | वैसे भी, जब लगभग सारा विश्व ही इस आपदा से जूझ रहा है तो किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत राशि और उसके सम्भावित परिणामों का कोई महत्त्व नहीं रह जाता |

चैत्र नवरात्र के साथ उत्सव का समय आरम्भ होने जा रहे हैं – 23/24 मार्च को अमावस्या है और उसके बाद 25 मार्च से साम्वत्सरिक चैत्र नवरात्रों तथा गुडी पर्व और उगडी के साथ भारतीय हिन्दू नव वर्ष प्रमादी नामक विक्रम सम्वत 2077 का आरम्भ होने जा रहा है | 25 को भगवती के शैलपुत्री रूप की, 26 को ब्रह्मचारिणी रूप की, 27 को चन्द्रघंटा रूप की, 28 को कूष्माण्डा रूप की और 29 को स्कन्दमाता रूप की उपासना की जाएगी | माँ भगवती को नमन करते हुए हम सभी मिलकर संकल्प लें कि इस महामारी को हराएँगे और पूर्ण मनोयोग से कल्पना करें कि हरा दिया है – सामूहिक स्तर पर ऐसा होगा तो माँ भगवती सभी कल्याण करेंगी और समस्त विश्व कोरोना जैसे महामारी पर विजय प्राप्त करने में सफल होगा – आज के साप्ताहिक राशिफल में केवल इतना ही…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/03/22/weekly-prediction-for-all-12-signs-from-23-march-to-29-march/

 

 

 

शुक्र का वृषभ में गोचर

शनिवार 28 मार्च, चैत्र शुक्ल चतुर्थी को विष्टि करण और विषकुम्भ योग में दिन में 3:38 के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि के कारक शुक्र का अपनी स्वयं की राशि वृषभ में प्रस्थान करेगा | शुक्र इस समय कृत्तिका नक्षत्र पर भ्रमण कर रहा है | वृषभ राशि में भ्रमण करते हुए शुक्र आठ अप्रैल से रोहिणी नक्षत्र तथा 27 अप्रैल से मृगशिरा नक्षत्र पर भ्रमण करेगा | तेरह मई से दिन में बारह बजकर तेरह मिनट के लगभग शुक्र वक्री होना आरम्भ होगा और 28 मई को रोहिणी नक्षत्र पर वापस पहुँच जाएगा | जहाँ से 25 जून से मार्गी होता हुआ 23 जुलाई को मृगशिरा नक्षत्र पर वापस पहुँचेगा और अन्त में 1 अगस्त को सूर्योदय से पूर्व पाँच बजकर ग्यारह मिनट के लगभग बुध की मिथुन राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | इस बीच 29 मई से नौ जून तक शुक्र अस्त भी रहेगा | वृषभ राशि में विचरण करते हुए शुक्र पर निरन्तर गुरु की दृष्टि रहेगी | कुछ समय के लिए मंगल की दृष्टि भी रहेगी | एक माह के लिए सूर्य का साथ भी रहेगा | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर आइये जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के वृषभ में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, उपरोक्त परिणाम सामान्य हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य और अनुभवी Astrologer के द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है | आपको तथा आपके जीवन साथी को धनलाभ के साथ अच्छे स्वादिष्ट भोजन का आनन्द भी प्राप्त होता रह सकता है | परिवार में माँगलिक आयोजनों की भी सम्भावना है | आपका अपना व्यवसाय है अथवा पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो उसमें प्रगति तथा उसके माध्यम से धनलाभ की सम्भावना है | कोई नया कार्य इस अवधि में करना चाहते हैं तो जीवन साथी की पार्टनरशिप में लाभदायक सिद्ध हो सकता है | यदि ऐसा नहीं भी है तो जीवन साथी से अपने कार्य में सहायता अवश्य लें | आपकी वाणी इस समय अत्यन्त प्रभावशाली हो सकती है | पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | अविवाहित हैं तो जीवन साथी की खोज भी इस अवधि में पूर्ण हो सकती है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपकी लग्न में ही गोचर कर रहा है | आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तनों के संकेत प्रतीत होते हैं | मान सम्मान में वृद्धि की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | समस्त प्रकार के भोग विलास के साधनों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | जीवन साथी का सहयोग आपको प्राप्त होता रहेगा तथा दाम्पत्य जीवन में मधुरता के भी संकेत हैं | अविवाहित जातकों की जीवन साथी की खोज भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु भली भाँति सोच समझकर ही आगे बढ़ना उचित रहेगा | स्वास्थ्य का जहाँ तक प्रश्न है तो विशेष रूप से महिलाओं को अपनी Gynaecologist से Regular Check-up कराते रहना चाहिए |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके द्वादश भाव में हो रहा है | आप सुख सुविधाओं पर बहुत धन इस अवधि में खर्च कर सकते हैं | साथ ही आपकी सन्तान कहीं बाहर उच्च शिक्षा के लिए भी जा सकती है | सन्तान के द्वारा भी व्यसनों में धन का अपव्यय हो सकता है | आप स्वयं भी केवल भ्रमण के लिए ही विदेश यात्रा कर सकते हैं | सन्तान तथा जीवन साथी के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता है |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके लाभ स्थान में हो रहा है | आर्थिक दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको कुछ नया कार्य भी प्राप्त हो सकता है | साथ ही वाहन तथा प्रॉपर्टी की खरीद फ़रोख्त में भी लाभ की सम्भावना है | यदि आप कलाकार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे जहाँ आपकी कला की प्रशंसा के साथ ही आपको आर्थिक लाभ तथा पुरूस्कार आदि भी प्राप्त होने की सम्भावना है | आपको अधिकारी वर्ग का तथा अपनी माता जी और बड़े भाई बहनों का विशेष सहयोग इस अवधि में प्राप्त रहेगा |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में राश्यधिपति के साथ ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं तो आपको अपनी कला के प्रदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे तथा आपके कार्य की प्रशंसा होगी | इसके अतिरिक्त यदि आप लेखक हैं, आप गीत-संगीत-नृत्य के कलाकार हैं, सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं अथवा ब्यूटी पार्लर का व्यवसाय है या Cosmetic Dentist हैं तो आपके लिए भी यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | अपने कार्य में आपको विशेष रूप से महिलाओं सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होने की सम्भावना है | परिवार में भी आनन्द का वातावरण बना रहने की सम्भावना है |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र भाग्य स्थान में गोचर कर रहा है | आपके लिए भी समय भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | कार्य के सिलसिले में यात्राओं में वृद्धि के योग भी प्रतीत होते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है | आप अपनी वाणी से दूसरों को प्रभावित करने में सफल हो सकते हैं |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से अष्टम में गोचर कर रहा है | अप्रत्याशित लाभ की सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपकी रूचि रहस्य विद्याओं जैसे ज्योतिष, दर्शन और आध्यात्म के अध्ययन में प्रवृत्त हो सकती है | कोई शोध कार्य यदि आप कर रहे हैं तो वह भी इस अवधि में पूर्ण होने की सम्भावना है | जीवन साथी अथवा प्रेमी / प्रेमिका के साथ सम्बन्धों में अन्तरंगता में वृद्धि के संकेत हैं | किन्तु साथ ही स्वास्थ्य के प्रति भी सावधान रहने की आवश्यकता है | महिलाओं को विशेष रूप से अपनी Gynaecologist से नियमित चेकअप कराने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है | इस अवधि में आपका वैवाहिक जीवन सुखद रहने के संकेत हैं | कार्य की दृष्टि से भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | कहीं विदेश से धनलाभ की सम्भावना है | आप जीवन साथी के साथ कहीं विदेश में निवास की योजना भी बना सकते हैं | पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि अविवाहित हैं तो इस अवधि में आपका विवाह भी सम्भव है | किन्तु साथ ही महिलाओं को विशेष रूप से स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या हो सकती है जिस पर पैसा खर्च हो सकता है | अतः नियमित रूप से अपनी Gynaecologist से चेकअप अवश्य कराती रहें |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपके छठे भाव में अपनी ही राशि में गोचर कर रहा है | पारिवारिक आयोजनों में अपने मामा अथवा मौसी आदि से भेंट करने के अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं तथा उनके माध्यम से आपको अपने कार्य में भी लाभ मिल सकता है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है तथा उसके माध्यम से भी आपको अर्थलाभ हो सकता है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें सफलता प्राप्त होने की सम्भावना है | नई नौकरी की खोज में हैं तो वह भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु प्रेम सम्बन्धों में अथवा वैवाहिक जीवन में यदि समझदारी से नहीं चलेंगे तो साथी के साथ मनमुटाव भी हो सकता है |

मकर : आपका योगकारक आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | एक ओर जहाँ आपके अपने कार्य के लिए यह गोचर अत्यधिक अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर आपकी सन्तान के लिए भी भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आप यदि वर्तमान कार्य छोड़कर कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में  प्रेम और आनन्द का वातावरण बने रहने की सम्भावना है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना है | साथ ही यदि आप कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य करते हैं या आपका ब्यूटी पार्लर है तो आपके लिए भी यह गोचर विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका भी योगकारक शुक्र आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | अत्यन्त भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन – जैसे बच्चे का जन्म आदि – भी हो सकता है | आप अपने घर को Renovate करा सकते हैं अथवा नया घर या वाहन आदि खरीद सकते हैं | कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन सन्तोषजनक रहने की सम्भावना है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है | आप यदि किसी नौकरी में हैं तो उसमें परिवर्तन की सम्भावना है | साथ ही आपके उत्साह और पराक्रम में वृद्धि की भी सम्भावना है | आप यदि हाथ के कारीगर हैं तो आपको अचानक अपने कार्य के प्रदर्शन का भी अवसर प्राप्त हो सकता है और इसके लिए आपको दूर पास की यात्राएँ भी करनी पड़ सकती हैं | साथ ही जो लोग मीडिया से सम्बन्ध रखते हैं उनके लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आपको अपने कार्यों में अपने छोटे भाई बहनों का सहयोग भी प्राप्त रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/03/20/venus-transit-in-taurus-2/

चैत्र नवरात्र 2020

चैत्र नवरात्र 2020 की तिथियाँ

बुधवार 25 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से घट स्थापना तथा माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप “शैलपुत्री” की उपासना के साथ ही चैत्र नवरात्र या वासन्तिक नवरात्र या साम्वत्सरिक नवरात्र के रूप में माँ भवानी के नवरूपों की पूजा अर्चना आरम्भ हो जाएगी और इसी के साथ आरम्भ हो जाएगा “प्रमादी” नाम का विक्रम सम्वत 2077 तथा “शार्वरी” नाम का शालिवाहन शक सम्वत 1942 | सभी को भारतीय वैदिक नववर्ष की अनेकशः हार्दिक शुभकामनाएँ…

यों प्रतिपदा तिथि का आरम्भ 24 मार्च को दिन में 2:59 के लगभग हो जाएगा और पच्चीस मार्च को दिन में पाँच बजकर अट्ठाईस मिनट तक रहेगी | 24 मार्च को सूर्योदय में प्रतिपदा तिथि नहीं होने के कारण घट स्थापना अगले दिन यानी 25 मार्च को की जाएगी | इस दिन सूर्योदय प्रातः छह बजकर उन्नीस मिनट पर है | इस समय सूर्य मीन राशि तथा उत्तर भाद्रपद नक्षत्र पर और चन्द्रमा मीन राशि तथा रेवती नक्षत्र पर होगा | बव करण और ब्रह्म योग होगा | शनि स्वराशिगत मकर में उच्च के मंगल के साथ रहेगा | प्रातः 6:19 से 7:17 घट स्थापना का मुहूर्त विद्वान् पण्डित लोगों ने बताया है | बुधवार होने के कारण इस दिन अभिजित नक्षत्र नहीं है, इसलिए इस नक्षत्र का लाभ उठाकर देर से घट स्थापना नहीं की जा सकती | किन्तु साथ ही व्यक्तिगत रूप से घट स्थापना का मुहूर्त जानने के लिए अपने Astrologer से अपनी कुण्डली के अनुसार मुहूर्त ज्ञात करना होगा | गुरूवार दो अप्रेल को कन्या पूजन के साथ ही विसर्जन हो जाएगा | अस्तु, सर्वप्रथम सभी को नव सम्वत्सर, गुडी पर्व और उगडी या युगादि की हार्दिक शुभकामनाएँ…

नवरात्रि के महत्त्व के विषय में विशिष्ट विवरण मार्कंडेय पुराण, वामन पुराण, वाराह पुराण, शिव पुराण, स्कन्द पुराण और देवी भागवत आदि पुराणों में उपलब्ध होता है | इन पुराणों में देवी दुर्गा के द्वारा महिषासुर के मर्दन का उल्लेख उपलब्ध होता है | महिषासुर मर्दन की इस कथा को “दुर्गा सप्तशती” के रूप में देवी माहात्मय के नाम से जाना जाता है | नवरात्रि के दिनों में इसी माहात्मय का पाठ किया जाता है और यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है | जिसमें 537 चरणों में सप्तशत यानी 700 मन्त्रों के द्वारा देवी के माहात्मय का जाप किया जाता है | इसमें देवी के तीन मुख्य रूपों – काली अर्थात बल, लक्ष्मी और सरस्वती की पूजा के द्वारा देवी के तीन चरित्रों – मधुकैटभ वध, महिषासुर वध तथा शुम्भ निशुम्भ वध का वर्णन किया जाता है | इस वर्ष नवरात्रों की तिथियाँ इस प्रकार हैं…

बुधवार 25 मार्च     चैत्र शुक्ल प्रतिपदा   देवी के शैलपुत्री रूप की उपासना

कलश स्थापना

गुरूवार 26 मार्च     चैत्र शुक्ल द्वितीया   देवी के ब्रह्मचारिणी रूप की उपासना

शुक्रवार 27 मार्च     चैत्र शुक्ल तृतीया    देवी के चन्द्रघंटा रूप की उपासना

शनिवार 28 मार्च    चैत्र शुक्ल चतुर्थी     देवी के कूष्माण्डा रूप की उपासना

रविवार 29 मार्च     चैत्र शुक्ल पञ्चमी    देवी के स्कन्दमाता रूप की उपासना

सोमवार 30 मार्च    चैत्र शुक्ल षष्ठी     देवी के कात्यायनी रूप की उपासना

मंगलवार 31 मार्च   चैत्र शुक्ल सप्तमी    देवी के कालरात्रि रूप की उपासना

बुधवार 1 अप्रेल     चैत्र शुक्ल अष्टमी    देवी के महागौरी रूप की उपासना

गुरूवार 2 अप्रेल     चैत्र शुक्ल नवमी     देवी के सिद्धिदात्री रूप की उपासना

राम जन्म महोत्सव – राम नवमी

माँ भगवती सभी का कल्याण करें… सभी को नव सम्वत्सर, गुडी पर्व, उगडी या युगादि तथा नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/03/19/dates-for-chaitra-navratri-2020/

 

मंगल का मकर में गोचर

चैत्र कृष्ण चतुर्दशी यानी रविवार 22 मार्च को दिन में दो बजकर चालीस मिनट के लगभग विष्टि करण और शुभ योग में मंगल का गोचर अपनी उच्च राशि मकर में होगा | सूर्योदय के समय त्रयोदशी तिथि रहेगी, किन्तु मंगल के गोचर के समय चतुर्दशी तिथि होगी | इस समय मंगल उत्तराषाढ़ नक्षत्र पर होगा | मकर राशि में राश्यधिपति शनि पहले से विराजमान हैं तथा 29 मार्च को अर्द्धरात्र्योत्तर गुरुदेव भी वहीं पहुँच जाएँगे | अपने इस गोचर के दौरान मंगल सात अप्रैल को श्रवण नक्षत्र तथा पच्चीस अप्रैल को धनिष्ठा नक्षत्र पर भ्रमण करता हुआ चार मई की रात्रि को आठ बजकर चालीस मिनट के लगभग शनि की दूसरी राशि कुम्भ में प्रस्थान कर जाएगा | अपनी उच्च राशि में प्रविष्ट होकर मंगल की दृष्टि स्वयं अपनी मेष राशि पर तथा कर्क और सिंह राशियों पर रहेगी | अर्थात मेष, कर्क, सिंह तथा मकर राशियाँ इस गोचर के दौरान मंगल से सीधे रूप में प्रभावित रहेंगी | साथ ही, मकर राशि के लिए मंगल चतुर्थेश तथा एकादशेश है और मंगल की अपनी एक राशि मेष से मकर राशि दशम भाव तथा दूसरी राशि वृश्चिक से तीसरा भाव बनती है |

ज्योतिष शास्त्र तथा भारतीय पौराणिक ग्रन्थों में मंगल को भूमि पुत्र कहा जाता है इसलिए मंगल को भौम के नाम से भी जाना जाता है तथा यह ऊर्जा और जुझारूपन का प्रतीक माना जाता है | मेष तथा वृश्चिक राशियों का अधिपति मंगल मकर में उच्च का हो जाता है और कर्क इसकी नीच राशि है | सूर्य, चन्द्र व गुरु के साथ इसकी मित्रता है, बुध और केतु के साथ शत्रुता है तथा शुक्र और शनि की राशियों में यह तटस्थ भाव में रहता है | इसका वर्ण रक्त के समान लाल है तथा इसे पित्त का कारक माना जाता है | स्वाभाविक क्रूर ग्रह मंगल यदि शुभ स्थिति में है तो निश्चित रूप से जातक के लिए शुभ फलदायी होता है | वास्तव में यह व्यक्ति को ऊर्जा प्रदान करके जीवन में कठिन से कठिन परिस्थितियों का भी साहस के साथ सामना करने योग्य बनाता है | इन्हीं समस्त तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं कि मंगल के मकर में प्रवेश के प्रत्येक राशि पर क्या सम्भावित प्रभाव हो सकते हैं…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य यानी Common हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

मेष : आपका लग्नेश और अष्टमेश आपके दशम भाव में गोचर करेगा तथा वहाँ से आपकी लग्न, चतुर्थ भाव तथा पञ्चम भाव पर उसकी दृष्टियाँ होंगी | आपके कार्य की दृष्टि से तथा आपकी सन्तान के लिए यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अचानक ही किसी ऐसे स्थान से भी कार्य तथा धन का लाभ हो सकता है जहाँ के विषय में आपने सोचा भी नहीं होगा | कार्य में प्रगति की सम्भावना है | यदि कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं तो उसके लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | आपकी सन्तान की ओर से भी कोई शुभ समाचार इस अवधि में प्राप्त हो सकता है | किन्तु स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं के कारण कार्य में बाधा भी पड़ सकती है, अतः स्वास्थ्य का ध्यान रखें और प्राणायाम, ध्यान तथा योग आदि को अपनी दिनचर्या में सम्मिलित करें |

वृषभ : आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के भाग्य स्थान में हो रहा है तथा वहाँ से आपके बारहवें भाव, तीसरे भाव तथा चतुर्थ भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | लाभदायक और लम्बी विदेश यात्राओं के योग प्रतीत होते हैं | आपके जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | जिन लोगों का कार्य विदेशों से सम्बद्ध है उनके लिए लाभ एक अवसर हैं | परिवार में किसी मंगलकार्य के सम्पन्न होने की भी सम्भावना है | आप इस अवधि में कोई नया घर भी ख़रीद सकते हैं | साथ ही धार्मिक कार्यों में रूचि में वृद्धि की सम्भावना है | सम्भव है किसी अस्पताल अथवा धर्म स्थल के लिए आप कुछ धन दान भी कर दें | साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक है |

मिथुन : षष्ठेश और एकादशेश होकर मंगल का गोचर आपकी कुण्डली के अष्टम भाव में होने जा रहा है और वाहन से आपके लाभ स्थान, दूसरे भाव तथा तीसरे भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | अचानक ही किसी स्रोत से आर्थिक लाभ की सम्भावना की जा सकती है | किसी पैतृक सम्पत्ति का लाभ भी हो सकता है किन्तु सारे Documents को अच्छी तरह जाँच परख लें | हो सकता है वह सम्पत्ति विवादों में फँसी हुई हो | किसी कोर्ट के माध्यम से आपको लाभ भी हो सकता है | किन्तु भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का क्लेश भी सम्भव है | साथ ही स्वास्थ्य की दृष्टि से भी समय अधिक अनुकूल नहीं प्रतीत होता | डॉक्टर से नियमित चेकअप कराते रहें तथा अपने खान पान का ध्यान रखें |

कर्क : आपके लिए पंचमेश और दशमेश होकर मंगल आपके लिए योगकारक हो जाता है और इस समय इसका गोचर आपके सप्तम भाव में होने जा रहा है, जहाँ से आपके कर्म स्थान, लग्न और दूसरे भाव पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | आप यदि प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी कार्य से सम्बद्ध हैं तो आपके लिए यह गोचर अनुकूल फल देने वाला प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो किसी आधिकारिक पड़ पर आपकी पदोन्नति भी हो सकती है | आपकी सन्तान और जीवन साथी के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि किसी के साथ प्रेम सम्बन्ध हैं तो उनमें अन्तरंगता आने की सम्भावना है, किन्तु यदि विवाहित हैं तो आपस में मनमुटाव की स्थिति न आने दें | साथ ही स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है |

सिंह : आपका चतुर्थेश और नवमेश होकर मंगल आपके लिए योगकारक बन जाता है तथा इस समय इसका गोचर आपकी राशि से छठे भाव में हो रहा है, जहाँ से आपके भाग्य स्थान, बारहवें भाव तथा लग्न पर इसकी दृष्टियाँ हैं | कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक समय प्रतीत होता है | एक ओर जहाँ आपके उत्साह में वृद्धि के साथ ही आपके कार्यों के समय पर पूर्ण होने की भी सम्भावना है, वहीं इस अवधि में आपके लिए विदेश यात्राओं के योग भी बन रहे हैं | पारिवारिक दृष्टि से सम्भव है यह समय अधिक अनुकूल न रहे, किन्तु यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका परिणाम आपके पक्ष में आ सकता है | प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे लोगों के लिए तथा स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल परिणाम देने वाला प्रतीत होता है |

कन्या : आपका तृतीयेश और अष्टमेश मंगल आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है जहाँ से आपके अष्टम भाव, लाभ स्थान तथा बारहवें भावों पर इसकी दृष्टियाँ आ रही हैं |  इस अवधि में विदेश यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | ये यात्राएँ आपके कार्य के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती हैं, किन्तु इन यात्राओं के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता होगी | आपकी सन्तान के लिए ये गोचर लाभदायक प्रतीत होता है और उसकी ओर से कोई शुभ समाचार आपको प्राप्त हो सकता है | यदि आपकी सन्तान विवाह योग्य है तो उसके विवाह की भी सम्भावना इस अवधि में की जा सकती है | साथ ही आपके भाई बहनों के लिए भी ये गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि कहीं प्रेम प्रसंग चल रहा है तो उसमें सावधान रहने की आवश्यकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के प्रति ईमानदार रहें | साथ ही स्वास्थ्य की ओर से भी सावधान रहने की आवश्यकता है |

तुला : आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर मंगल का गोचर आपके चतुर्थ भाव में हो रहा है जहाँ से आपके सप्तम भाव, दशम भाव तथा एकादश भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आपके तथा आपके जीवन साथी के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | कार्य में उन्नति तथा आय में वृद्धि के योग हैं | प्रॉपर्टी की ख़रीद फ़रोख्त में लाभ की सम्भावना की जा सकती है | नौकरी में हैं तो पदोन्नति भी हो सकती है | पॉलिटिक्स से जुड़े लोगों के लिए भी पदलाभ के अवसर प्रतीत होते हैं | किन्तु परिवार में अकारण ही तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है | अपनी वाणी तथा विचारों पर संयम आवश्यक है | साथ ही स्वस्थ रहने के लिए खान पान पर भी नियन्त्रण आवश्यक है |

वृश्चिक : आपका लग्नेश और षष्ठेश होकर मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में हो रहा है और वहाँ से आपके छठे भाव, भाग्य स्थान तथा कर्म स्थानों पर इसकी दृष्टियाँ होंगी | यह गोचर उत्साहवर्द्धक तथा कार्य की दृष्टि से भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपको अपने छोटे भाई बहनों का सहयोग प्राप्त होता रहने की सम्भावना है | कार्यस्थल में भी सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होता रह सकता है | इस अवधि में आप हर प्रकार के विरोध को समाप्त करने में सक्षम रहेंगे | साथ ही यदि कोई कोर्ट केस चल रहा होगा तो उसका परिणाम भी आपके पक्ष में आ सकता है | किन्तु साथ ही स्वास्थ्य की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना की जा सकती है |

धनु : आपकी राशि के लिए मंगल पंचमेश तथा द्वादशेश होकर आपके द्वितीय भाव में गोचर कर रहा है जहाँ से आपके सन्तान भाव, अष्टम भाव तथा भाग्य स्थानों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | एक ओर जहाँ आर्थिक रूप से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है वहीं दूसरी ओर सन्तान से सम्बन्धित किसी समस्या के कारण या स्वास्थ्य सम्बन्धी किसी समस्या के कारण धन भी अधिक खर्च होने की सम्भावना है | किन्तु साथ ही आपकी सन्तान के कार्य की दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | यदि आपने अपनी वाणी पर संयम नहीं रखा तो परिवार के मुखिया अथवा सन्तान के साथ बहस भी हो सकती है जिसके कारण आपको मानसिक तनाव भी हो सकता है | आपकी सन्तान किसी कार्यवश अथवा उच्च शिक्षा के लिए कहीं विदेश भी जा सकती है | आप भी सपरिवार विदेश यात्रा की योजना बना सकते हैं |

मकर : आपके लिए तो आपकी राशि में ही आपके चतुर्थेश और एकादशेश का गोचर हो रहा है और वहाँ से इसकी दृष्टियाँ आपके चतुर्थ भाव, सप्तम भाव तथा अष्टम भाव पर आ रही हैं | मान प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं | प्रॉपर्टी अथवा वाहन आदि से सम्बन्धित किसी व्यवसाय में हैं या किसी प्रकार की कोई इण्डस्ट्री आदि है तो उसमें भी लाभ की सम्भावना की जा सकती है | आप अपने लिए भी नया घर खरीद सकते हैं | पार्टनरशिप में जिन लोगों का व्यवसाय है उनके लिए भी लाभ की सम्भावना है | अविवाहित हैं तो इस अवधि में जीवन साथी की तलाश भी पूर्ण हो सकती है | किन्तु वाहन चलाते समय सावधान रहने की आवश्यकता है |

कुम्भ : आपका तृतीयेश और दशमेश आपके बारहवें भाव में गोचर कर रहा है जहाँ से आपके तीसरे भाव, छठे भाव तथा सप्तम भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | कार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में पैसा इन्वेस्ट कर सकते हैं अथवा कार्य से सम्बन्धित खर्चों में वृद्धि हो सकती है | पैसा इन्वेस्ट करने से पूर्व किसी अनुभवी व्यक्ति से इस विषय में सलाह अवश्य कर लें | छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार का मन मुटाव भी सम्भव है | यदि आपका कार्य विदेश से सम्बन्धित है तो आपको लाभ की सम्भावना है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | जीवन साथी के साथ व्यर्थ की बहस से बचने का प्रयास करें |

मीन : द्वितीयेश और भाग्येश का आपके लाभ स्थान में हो रहा है जहाँ से आपके दूसरे भाव, पञ्चम भाव तथा छठे भावों पर इसकी दृष्टियाँ हैं | आर्थिक दृष्टि से यह गोचर भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | कुछ पुरानी इच्छाओं की पूर्ति भी इस अवधि में हो सकती है | बड़े भाई, मित्रों, सहकर्मियों तथा अधिकारी वर्ग का सहयोग प्राप्त होता रहेगा | पदोन्नति की भी सम्भावना स अवधि में की जा सकती है | सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | किसी पुरानी बीमारी के भी ठीक होने की सम्भावना है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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सूर्य का मीन में गोचर

शनिवार 14 मार्च 2020 को दिन में 11:54 के लगभग पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए ही भगवान् भास्कर अपने शत्रु ग्रह शनि की राशि कुम्भ से निकल कर मित्र ग्रह गुरु की मीन राशि में भ्रमण करने के लिए प्रस्थान करेंगे जहाँ शनि की तीसरी दृष्टि भी सूर्य पर रहेगी | सूर्य के मीन राशि में प्रस्थान के समय चैत्र कृष्ण षष्ठी तिथि, मिथुन लग्न, गर करण और हर्षण योग रहेगा | मीन राशि में विचरण करते हुए भगवान भास्कर 17 मार्च से उत्तर भाद्रपद तथा 31 मार्च से रेवती नक्षत्र पर भ्रमण करते हुए अन्त में तेरह अप्रैल को रात्रि आठ बजकर तेईस मिनट के लगभग मंगल की मेष राशि और अश्विनी नक्षत्र पर पहुँच जाएँगे | सूर्य की अपनी राशि सिंह से मीन राशि अष्टम भाव में आती है तथा सूर्य की उच्च राशि मेष से द्वादश भाव में आती है | मीन राशि के लिए सूर्य षष्ठेश बन जाता है | किन्तु ध्यान देने योग्य बात है कि सिंह और मीन में षडाष्टक होते हुए भी दोनों के अधिपति ग्रह सूर्य और गुरु परस्पर मित्र ग्रह हैं, अतः मतभेद हो सकते हैं, किन्तु शत्रुता नहीं हो सकती और एक दूसरे के सहायक भी दोनों ग्रह बन जाते हैं | इन्हीं समस्त तथ्यों को आधार बनाकर मीन राशि में सूर्य के संक्रमण के जनसाधारण पर होने वाले सम्भावित परिणामों पर दृष्टिपात करने का प्रयास किया गया है…

किन्तु ध्यान रहे, ये परिणाम सामान्य यानी Common हैं | किसी कुण्डली के विस्तृत फलादेश के लिए केवल एक ही ग्रह के गोचर को नहीं देखा जाता अपितु किसी योग्य Astrologer द्वारा उस कुण्डली का विभिन्न सूत्रों के आधार पर विस्तृत अध्ययन आवश्यक है |

इस बीच पन्द्रह मार्च को शीतला सप्तमी, इक्कीस मार्च को शनि प्रदोष, तेईस मार्च को सोमवती अमावस्या, पच्चीस मार्च को चैत्र नवरात्र के साथ शार्वरी नामक नवसंवत्सर और गुडी पर्व, दो अप्रैल को रामनवमी के साथ गुरुपुष्यामृत योग में नवरात्रों का विसर्जन, चार अप्रैल को चैत्र शुक्ल एकादशी, पाँच अप्रैल को प्रदोष व्रत, छह अप्रैल को महावीर जयन्ती, सात अप्रैल को हनुमान जयन्ती का उपवास, आठ अप्रैल को हनुमान जयन्ती, दस अप्रैल को गुड़ फ्राइडे, बारह अपेल को ईस्टर सन्डे, तेरह अप्रैल को बैसाखी तथा चौदह अप्रैल को असम का बिहाग बिहू और अम्बेडकर जयन्ती है, सभी को ये सभी व्रतोत्सव मंगलमय हों…

मेष : आपके लिए पंचमेश होकर सूर्य का गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव में हो रहा है | आपके लिए उत्साह तथा प्रतियोगी क्षमता में वृद्धि के योग प्रतीत होते हैं | कार्य में उन्नति की दृष्टि से तथा आर्थिक दृष्टि से यह समय विशेष रूप से अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही जो लोग उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहते हैं उनके लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | साथ ही इस यात्रा के दौरान उन्हें विदेश भ्रमण का अवसर भी प्राप्त हो सकता है | कार्य के क्षेत्र में आपके लिए परिवर्तन तथा व्यस्तताओं का समय प्रतीत होता है | सम्भव है आपका कहीं ट्रांसफर हो जाए या आप वर्तमान नौकरी को छोड़कर किसी नई नौकरी में नए स्थान पर चले जाएँ | आँखों के इन्फेक्शन की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | सन्तान के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए काफी हलचल भरा समय प्रतीत होता है |

वृषभ : सूर्य आपके लिए चतुर्थेश है और लाभ स्थान में गोचर करने जा रहा है | किसी प्रकार की सम्पत्ति का लाभ हो सकता है | आप अपने वर्तमान निवास को बेचकर कोई नया घर भी खरीद सकते हैं | यदि आप प्रॉपर्टी से सम्बन्धित किसी व्यवसाय में हैं तो उसमें भी आपको लाभ हो सकता है | प्रॉपर्टी से सम्बन्धित आवश्यक कार्यों का निबटारा भी आप इस अवधि में कर सकते हैं | मित्रगणों तथा अधिकारीगणों का साथ और सहयोग दोनों इस अवधि में प्राप्त रहने की सम्भावना है | हाँ आपके बड़े भाई अथवा पिता के कारण किसी प्रकार की चिन्ता हो सकती है | राजनीति से सम्बद्द्ध लोगों के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

मिथुन : आपका तृतीयेश होकर सूर्य आपके दशम भाव में प्रस्थान करने जा रहा है | यदि आप हाथ के कारीगर हैं, सर्जन हैं, डॉक्टर हैं या मीडिया अथवा आई टी से सम्बन्धित किसी कार्य में संलग्न हैं तो आपके लिए तो समय विशेष रूप से लाभदायक प्रतीत होता है | नौकरी में हैं तो आपका प्रदर्शन इस अवधि में बहुत अच्छा रहने की सम्भावना है, जिसके कारण आपके अधिकारी आपसे प्रसन्न रहेंगे आपको अपने पिता तथा प्रभावशाली लोगों की ओर से प्रशंसा तथा सहयोग प्राप्त होता रहेगा, किन्तु छोटे भाई बहनों तथा अधीनस्थ कर्मचारियों के कारण परिवार में अथवा कार्यस्थल पर वातावरण तनावपूर्ण हो सकता है |

कर्क : आपके लिए आपका द्वितीयेश होकर सूर्य आपके नवम भाव में प्रस्थान करने जा रहा है | जो वास्तव में भाग्यवर्द्धक प्रतीत होता है | आपकी आय में वृद्धि की सम्भावना के साथ साथ आपके लिए यश और प्रतिष्ठा में वृद्धि के भी योग बन रहे हैं | ऐसा भी हो सकता है कि आप आध्यात्मिक और धार्मिक कारणों से किसी तीर्थ स्थान की यात्रा के लिए चले जाएँ अथवा अपने कार्य के सिलसिले में किसी लम्बी यात्रा पर निकल जाएँ | रुके हुए कार्य पूर्ण होने की सम्भावना है | किन्तु इस अवधि में आपकी वाणी में कुछ तीखापन आ सकता है जिसके कारण आपके पिता के साथ सम्बन्धों में तनाव की स्थिति आ सकती है | अतः अपनी वाणी पर नियन्त्रण रखने की आवश्यकता है | साथ ही आँखों में इन्फेक्शन, हाई ब्लड प्रेशर अथवा मानसिक तनाव की समस्या भी हो सकती है |

सिंह : आपका लग्नेश होकर सूर्य आपके अष्टम भाव में संचार करने जा रहा है | यह समय स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ अनुकूल नहीं प्रतीत होता | सरदर्द या माइग्रेन यदि रहता है तो उसमें वृद्धि भी हो सकती है | साथ ही शरीर में आलस्य की वृद्धि भी हो सकती है जिसके कारण आपका कार्य में मन नहीं लगेगा | साथ ही आपके कुछ गुप्त विरोधी भी इस समय मुखर हो सकते हैं अतः हर किसी के सामने अपनी योजना के विषय में न बताएँ | पहले सम्बन्धित व्यक्ति के में जाँच पड़ताल कर लें उसके बाद ही अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करें | आप कहीं भ्रमण के लिए भी जाने का मन इस अवधि में बना सकते हैं जो आपके जीवन की एकरसता को दूर करने के लिए उचित रहेगा |

कन्या : आपका द्वादशेश आपके सप्तम भाव में गोचर करने जा रहा है | आपके जीवन साथी के स्वभाव में कुछ चिडचिडापन आ सकता है अतः उनके साथ व्यर्थ के विवाद से बचने का प्रयास करें | आप किसी विदेशी कम्पनी अथवा बाहर बसे हुए किसी मित्र के साथ कोई नया कार्य आरम्भ कर सकते हैं अथवा उसके निमन्त्रण पर वहाँ जाकर स्वयं कोई कार्य तलाश सकते हैं | आप अपने परिश्रम तथा ज्ञान के बल पर उपलब्ध कार्य को समय पर पूर्ण करने में समर्थ हो सकते हैं | किन्तु साथ ही अपने स्वयं के व्यवसाय में किसी भी नई डील को अभी कुछ समय के लिए स्थगित कर देंगे तो अच्छा रहेगा | पार्टनरशिप में कोई कार्य कर रहे हैं तो वहाँ संयम से काम लेने की आवश्यकता है | अपने जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने की आवश्यकता है |

तुला : आपका एकादशेश होकर सूर्य आपके छठे भाव में गोचर करने वाला है | आर्थिक दृष्टि से यह समय कुछ समस्याओं से युक्त हो सकता है | धन की हानि की सम्भावना है | घर तथा ऑफिस में काम कर रहे लोगों की ओर से सावधान रहने की आवश्यकता है | साथ ही नई नियुक्तियाँ करने से पूर्व सारे सम्बन्धित Documents को अच्छी तरह जाँच लें | आपको अपने बड़े भाई अथवा पिता से किसी प्रकार धनलाभ की सम्भावना है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका भी निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है और उसके द्वारा भी आपको धनलाभ हो सकता है | अपने तथा अपने बड़े भाई और पिता के भी स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

वृश्चिक : आपका दशमेश आपके पंचम भाव में गोचर करने जा रहा है | जीवन में कुछ बड़े परिवर्तन इस अवधि में हो सकते हैं | सम्भव है आप जिस नौकरी में हैं उसे छोड़कर कोई दूसरी नौकरी कर लें, या व्यवसाय में हैं तो वर्तमान व्यवसाय को छोड़कर अथवा उसके साथ ही कोई नया व्यवसाय भी आरम्भ कर लें | आपके जीवन साथी के लिए भी किसी नवीन व्यवसाय के आरम्भ होने की सम्भावना है | अचानक ही आपको अपनी पदोन्नति का समाचार भी प्राप्त हो सकता है अथवा परिवार में नवशिशु का आगमन हो सकता है अथवा किसी मंगलकार्य का आयोजन हो सकता है | आपकी रूचि अध्ययन में बढ़ सकती है | आपकी सन्तान की ओर से भी आपको शुभ समाचार प्राप्त होने की सम्भावना है | किन्तु सन्तान के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है | साथ ही अपने व्यवहार पर नियन्त्रण नहीं रखा तो जीवन साथी के साथ भी सम्बन्धों में कड़वाहट भी आ सकती है |

धनु : सूर्य आपकी राशि के लिए भाग्येश है तथा आपके चतुर्थ भाव में गोचर करने जा रहा है | आर्थिक दृष्टि से भी और पारिवारिक स्तर भी समय लाभदायक प्रतीत होता है | यद्यपि परिवार समाज में आपका सम्मान और प्रतिष्ठा इस अवधि में बढ़ सकती है, किन्तु आपके स्वभाव की उग्रता परिवार की शान्ति भंग कर सकती है | ध्यान प्राणायाम आदि के द्वारा आप अपने व्यवहार को नियन्त्रित कर सकते हैं | परिवार में किसी मंगल कार्य की सम्भावना भी इस अवधि में की जा सकती है | आप यदि कोई शोध कार्य कर रहे हैं तो उसमें अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | इसके अतिरिक्त प्रॉपर्टी के व्यवसाय में भी लाभ की सम्भावना है | आपको अपने पिता की ओर से वाहन अथवा घर भी उपहारस्वरूप प्राप्त हो सकता है | पॉलिटिक्स से सम्बद्ध लोगों के लिए भी समय अनुकूल प्रतीत होता है | माता पिता का स्वास्थ्य चिन्ता का विषय हो सकता है |

मकर : आपका अष्टमेश होकर सूर्य तृतीय भाव में गोचर करने वाला है | लक्ष्य के प्रति आपकी एकाग्रता में इस अवधि में और अधिक दृढ़ता आने की और उत्साह तथा मनोबल में और अधिक वृद्धि होने की सम्भावना है जिसके कारण आपके कार्य समय पूर्ण होते रहने की सम्भावना है | आप अपनी वर्तमान नौकरी को छोड़कर कोई नई नौकरी करने का विचार भी बना सकते हैं | अपना स्वयं का व्यवसाय है तो कोई नया कार्य आरम्भ कर सकते हैं | यदि ऐसा है तो आपको उसमें सफलता प्राप्त होने की भी सम्भावना है | किन्तु छोटे भाई बहन अथवा पिता के स्वास्थ्य के विषय में चिन्ता हो सकती है | साथ ही छोटे भाई बहनों के साथ किसी प्रकार विवाद भी बड़ा रूप ले सकता है | कार्यक्षेत्र में अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ व्यर्थ की बहस की सम्भावना है | इससे बचने का एक ही उपाय है – अतः अपनी वाणी और व्यवहार पर नियन्त्रण रखना |

कुम्भ : आपका सप्तमेश आपके द्वितीय भाव में गोचर करने वाला है | आपके जीवन साथी के माध्यम से आपको अर्थलाभ की सम्भावना है | किन्तु आपके स्वभाव में इस समय उग्रता अधिक बढ़ी हुई है जिसके कारण परिवार की शान्ति भंग होने की सम्भावना है | अतः अपनी उग्रता पर नियन्त्रण रखें और इसके लिए ध्यान, योग तथा प्राणायाम आदि का नियमित अभ्यास अवश्य करें | पारिवारिक तनावों का दुष्प्रभाव आपके तथा आपके जीवन साथी के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है और आपके पिता अथवा परिवार के किसी बुज़ुर्ग व्यक्ति का स्वास्थ्य भी इसी कारण प्रभावित हो सकता है | अतः यथासम्भव इस प्रकार के विवादों से बचने का प्रयास करें |

मीन : आपका षष्ठेश होकर सूर्य आपकी ही राशि में गोचर करने वाला है | आपके लिए यह गोचर अत्यन्त महत्त्व रखता है | यदि आप किसी सरकारी नौकरी में हैं, कोर्ट कचहरी से सम्बन्धित किसी कार्य में हैं, स्पोर्ट्स में हैं अथवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में हैं तो आपके लिए समय उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है | सामाजिक गतिविधियों में वृद्धि की सम्भावना भी है | यदि कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसका भी निर्णय इस अवधि में आपके पक्ष में आ सकता है | आपका जीवन साथी आपके लिए पूर्ण रूप से समर्पित है, आवश्यकता है आप अपने Temperament पर नियन्त्रण रखें | साथ ही सर में दर्द, ज्वर आदि की समस्या भी हो सकती है |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं | सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

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होली है

टेसू – प्रेम और प्यार का रंग

कल यानी आठ मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस है – सशक्त नारी शक्ति को बधाई और शुभकामनाएँ… इस कामना के साथ कि अभी भी जो महिलाएँ दुर्बल हैं उन्हें सशक्त बनाने में उनकी मदद करेंगे…

इसके साथ ही नौ व दस मार्च को होली का रंगारंग त्यौहार – कोरोना के डर ने जिसके रंग फीके कर दिए हैं | लेकिन कोरोना से डरने के बजाए यदि सुरक्षात्मक उपाय – जैसे बाहर भीतर सफाई रखना, घर का बना सन्तुलित आहार लेना – इत्यादि का पालन किया जाए तो कोरोना ही क्या, कोई भी वायरस डरकर दूर भाग जाएगा | वैसे भी पारम्परिक रूप से यदि होली का त्यौहार मनाया जाए तो किसी भी तरह के वायरस अपने आप ही नष्ट हो जाते हैं | जैसे होलिका दहन की अग्नि यज्ञ की सामग्री से प्रज्वलित करने की प्रथा रही है | यज्ञ की सामग्री में सभी प्रकार के कीटाणु समाप्त करने की क्षमता होती है – सम्भवतः इसीलिए हमारे पूर्वज इस प्रथा का पालन करते थे | साथ ही, जिन टेसू के पूलों को पकाकर उनके रंग से होली खेली जाती थी उनमें भी बहुत से गुण हैं |

टेसू को कई नामों से जाना जाता है : पलाश, परसा, ढाक, किंशुक (इनका आकार तोते की लाल चोंच सा होने के कारण इन्हें संस्कृत में किंशुक – कहीं ये तोता तो नहीं ? कहा जाता है) वग़ैरा वग़ैरा | इसे “जंगल की आग” भी कहा जाता है | संस्कृत साहित्य में बड़ा ख़ूबसूरत प्रयोग कई जगहों पर इस “जंगल की आग” का हुआ है – ख़ासतौर पर प्रेम के उद्दीपन और विरह के वर्णनों में | इसके अतिरिक्त, जब तक उत्तराखण्ड उत्तर प्रदेश में शामिल था तब तक ब्रह्मकमल उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प कहलाता था, उसके बाद से टेसू का पुष्प उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प घोषित किया गया | ये तो एक पेड़ होता है, इसी नाम की एक लता भी है जिस पर भी सफेद और लाल दोनों फूल आते हैं और उसे लता पलाश कहते हैं और उससे आयुर्वेदिक औषधियाँ बनाई जाती हैं |

इसका वर्णन वैदिक काल से ही उपलब्ध होता है तथा इसे पवित्र वृक्ष माना जाता है | श्रौतसूत्रों में कई यज्ञपात्र इसी की लकड़ी से बनाए जाने का वर्णन है | उपनयन के समय भी इसी की लकड़ी का दण्ड ब्रह्मचारी को दिया जाता था | और संस्कृत तथा हिन्दी के कवियों ने तो इसके सौन्दर्य पर न जाने कितनी रचनाएँ रच दी हैं |

माघ मास की समाप्ति पर ठण्ड की विदाई के साथ जब वसन्त ऋतु का आगमन होता है उस समय मानों ऋतुराज के स्वागत हेतु समस्त धरा अपने हरे घाघरे के साथ पलाश के पीत पुष्पों की चूनर ओढ़ लेती है और वृक्षों की टहनियों रूपी अपने हाथों में ढाक के इन श्वेत पुष्पों के चन्दन से ऋतुराज के माथे पर तिलक लगाकर लाल पुष्पों के दीपों से कामदेव के प्रिय मित्र का आरता उतारती है | वास्तव में अत्यन्त मनोहारी दृश्य होता है यह | होली के मौसम में जब टेसू के वृक्ष रक्तपुष्पों से लद जाते हैं तब ऐसा जान पड़ता है जैसे होली की उत्सव में मुख्य अतिथि ये ही हैं | प्रकृति नटी के चतुर चितेरे कालिदास को तो वसन्त ऋतु में पवन के झोंकों से हिलती हुई पलाश की टहनियाँ वन में धधक उठी दावानल की लपटों जैसी प्रतीत होती हैं और इनसे घिरी हुई धरा ऐसी प्रतीत होती है मानो रक्तिम वस्त्रों में लिपटी कोई नववधू हो |

टेसू के पुष्पों का केवल वैदिक या सांस्कृतिक महत्त्व हो ऐसा भी नहीं है | इनका आयुर्वेद की दृष्टि से भी अत्यन्त होलीमहत्त्व है | टेसू के पेड़ के लाल फूल जिनसे होली का रंग बनता है उन्हें भी इंफेक्शन वग़ैरा दूर करने वाला माना जाता है | इसके अलावा, कहते हैं इसके पानी में स्नान करने से गर्मी दूर भागती है और ताज़गी का अहसास होता | ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इसका उपयोग होता है | माना जाता है कि बहुत से चर्मरोग दूर करने में इसका पानी लाभ पहुँचाता है | कषैले और चरपरे स्वाद का यह वृक्ष तथा इसके सभी अंग ज्वर तथा कृमिनाशक होते हैं | खाँसी कफ इत्यादि में लाभदायक होता है |

तो इसलिए, क्यों न कोरोना से भयभीत हुए बिना टेसू के रंग में प्रेम और प्यार के रंगों को मिलाकर उनमें सराबोर होकर होली की मस्ती में डूब जाएँ…

होली है, हुडदंग मचा लो, सारे बन्धन तोड़ दो |

और नियम संयम की सारी आज दीवारें तोड़ दो ||

कैसा नखरा, किसका नखरा, आज सभी को रंग डालो |

जो होगा देखा जाएगा, आज न रंग में भंग डालो ||

माना गोरी सर से पल्ला खिसकाके देगी गाली

तीखी धार कटारी की है, मत समझो भोली भाली |

पर टेसू के रंग में इसको सराबोर तुम आज करो

शहद पगी गाली के बदले मुख गुलाल से लाल करो ||

पूरा बरस दबा रक्खी थी साध, उसे पूरी कर लो

जी भरके गाली दो, मन की हर कालिख़ बाहर फेंको ||

नहीं कोई है रीत, नहीं है कोई बन्दिश होली में

मन को जिसमें ख़ुशी मिले, बस ऐसी तुम मस्ती भर लो ||

जो रूठा हो, आगे बढ़के उसको गले लगा लो आज

बाँहों में भरके आँखों से मन की तुम कह डालो आज |

शरम हया की बात करो मत, बन्धन ढीले आज करो

नाचो गाओ धूम मचाओ, पिचकारी में रंग भरो ||

गोरी चाहे प्यार के रंग में रंगना, उसका मान रखो

कान्हा चाहे निज बाँहों में भरना, उसका दिल रख लो |

डालो ऐसा रंग, न छूटे बार बार जो धुलकर भी

तन मन पुलकित हो, कुछ ऐसा प्रेम प्यार का रंग भर दो ||

सभी के जीवन में सुख, सम्पत्ति, ऐश्वर्य, स्वास्थ्य, प्रेम, उल्लास और हर्ष के इन्द्रधनुषी रंग बिखरते रहें, इसी भावना के साथ सभी को महिला दिवस के साथ साथ अबीर की चमक, गुलाल के रंग और टेसू की भीनी भीनी ख़ुशबू से युक्त रंग और सुगन्ध के पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएँ…

https://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2020/03/07/tesu-the-colour-of-love-and-affection/