Super Blue Blood Moon – खग्रास चन्द्रग्रहण

via Super Blue Blood Moon – खग्रास चन्द्रग्रहण

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Super Blue Blood Moon – खग्रास चन्द्रग्रहण

कल 31 जनवरी 2018 को सारा भारत ही नहीं, संसार के कई देश एक ऐसी अद्भुत खगोलीय घटना के साक्षी बनने जा रहे हैं जो खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार अब काफ़ी वर्षों तक नहीं दीख पड़ेगी | इस भव्य घटना को नासा के खगोल वैज्ञानिकों ने नाम दिया है Super Blue Blood Moon, अर्थात इस दिन सुपर मून, ब्लू मून और चन्द्र ग्रहण एक साथ दिखाई देंगे | वैज्ञानिकों के अनुसार चाँद और धरती के बीच की दूरी जब सबसे कम हो जाती है और चाँद पहले से अधिक बड़ा तथा चमकीला दिखाई देने लगता है तब उसे सुपर मून कहा जाता है | और चन्द्र ग्रहण वह स्थिति है जिसमें चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य तीनों एक ही सीधी रेखा में आ जाते हैं, इस स्थिति में चन्द्रमा के कुछ अथवा पूरे भाग पर धरती की छाया पड़ने से सूर्य की किरणों का प्रकाश उस तक नहीं पहुँच पाता जिसके कारण वह धुँधला दिखाई देने लगता है |

माघ पूर्णिमा को होने वाला यह चन्द्र ग्रहण खग्रास चन्द्र ग्रहण होगा जो समस्त भारत में दिखाई देगा | सायं पाँच बजकर अठारह मिनट पर आरम्भ होकर रात्रि आठ बजकर बयालीस मिनट पर इस ग्रहण की समाप्ति होगी | ग्रहण आरम्भ होने के समय चन्द्रमा का संचार कर्क राशि तथा पुष्य नक्षत्र में होगा और समाप्ति के समय आश्लेषा नक्षत्र में | ग्रहण की कुल अवधि होगी तीन घंटे चौबीस मिनट । जिसमें पूर्ण चन्द्रग्रहण की अवधि 77 मिनट की होगी | भारत के पूर्वी भागों, असम, नागालैंड, मिजोरम, सिक्किम तथा पूर्वी बंगाल में चन्द्रमा ग्रस्त ही उदित होगा |

भारत में हिन्दू धर्म में सूर्य तथा चन्द्र ग्रहण के विषय में समुद्र मन्थन की पौराणिक कथा को आधार बनाया जाता है जब देवों और असुरों में अमृत के लिए घमासान चल रहा था और भगवान विष्णु ने मोहिनी का वेश बनाकर असुरों को रिझाया और उनसे अमृत घट अपने हाथों में ले लिया | जब वे उस अमृत को देवताओं में वितरित करने पहुँचे तो राहु नामक असुर भी देवों का वेश बनाकर उनके मध्य जा बैठा और अमृत का पान कर लिया | सूर्य तथा चन्द्रमा ने यह देख लिया और भगवान विष्णु को इशारा कर दिया | भगवान विष्णु ने तुरन्त अपने सुदर्शन चक्र से उसका सर धड़ से अलग कर दिया | किन्तु वह अमृत का पान कर चुका था अतः वह मरा तो नहीं, हाँ उसका सर और धड़ अलग अलग स्थानों पर गिरकर स्थापित हो गए और राहु तथा केतु के नाम से जाने जाने लगे | माना जाता है कि इसी का बदला लेने के लिए राहु सूर्य और चन्द्रमा को ग्रस लेता है जिसे सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण के नामों से जाना जाता है |

भारतीय Vedic Astrologers तथा पण्डितों की ऐसी मान्यता है कि ग्रहण की अवधि में उपवास रखना चाहिए, बालों में कंघी आदि नहीं करनी चाहिए, गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए अन्यथा गर्भस्थ शिशु पर ग्रहण का बुरा प्रभाव पड़ता है, तथा ग्रहण समाप्ति पर स्नानादि से निवृत्त होकर दानादि कर्म करने चाहियें | साथ ही जिन राशियों के लिए ग्रहण का अशुभ प्रभाव हो उन्हें विशेष रूप से ग्रहण शान्ति के उपाय करने चाहियें | इसके अतिरिक्त ऐसा भी माना जाता है कि पितृ दोष निवारण के लिए, मन्त्र सिद्धि के लिए तथा धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ग्रहण की अवधि बहुत उत्तम होती है |

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि ये सब खगोलीय घटनाएँ हैं और खगोल वैज्ञानिकों की खोज के विषय हैं | हम यहाँ बात करते हैं हिन्दू धार्मिक मान्यताओं की | भारतीय हिन्दू मान्यताओं तथा भविष्य पुराण, नारद पुराण आदि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चन्द्र ग्रहण एक ज्योतिषीय घटना है जिसका समूची प्रकृति पर तथा जन जीवन पर प्रभाव पड़ता है | भारतीय ज्योतिषियों के अनुसार कल होने वाला यह ग्रहण कर्क राशि तथा पुष्य और आश्लेषा नक्षत्रों में होगा | अधिकतर ज्योतिषियों का मानना है कि कर्क राशि तथा पुष्य और आश्लेषा नक्षत्र के जातकों के लिए यह ग्रहण शुभ फलदायी हो सकता है | उनकी बहुत समय से चली आ रही आर्थिक तथा मानसिक समस्याओं का समाधान हो सकता है तथा नौकरी और व्यवसाय में लाभ भी हो सकता है | वहीं दूसरी ओर कुछ ज्योतिषियों की राय में इन जातकों के लिए यह ग्रहण सबसे अधिक अशुभ फलदायी होगा अतः उन्हें विशेष रूप से ग्रहण की शान्ति के उपाय करने होंगे | इनके अतिरिक्त मेष, सिंह तथा धनु राशि वालों के लिए भी इस ग्रहण को अशुभ माना जा रहा है |

कुछ ज्योतिषियों तथा पण्डितों द्वारा यहाँ तक कहा जा रहा है कि चन्द्रमा का लाल रंग होना बहुत अशुभ होता है तथा इसके कारण जल प्रलय और अग्निकाण्ड जैसी दुर्घटनाओं में वृद्धि हो सकती है | किन्तु चन्द्रमा का लाल रंग ग्रहण काल में उस पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश के कारण होता है तथा इससे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है – ऐसा हमारा मानना है | साथ ही, इन सब बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, केवल जन साधारण की अपनी मान्यताओं, निष्ठाओं तथा आस्थाओं पर निर्भर करता है |

बहरहाल, मान्यताएँ और निष्ठाएँ, आस्थाएँ जिस प्रकार की भी हों, हमारी तो यही कामना है कि सब लोग स्वस्थ तथा सुखी रहें, दीर्घायु हों ताकि भविष्य में भी इस प्रकार की भव्य खगोलीय घटनाओं के साक्षी बन सकें…

 

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