शुक्र का सिंह में गोचर

आज आषाढ़ कृष्ण सप्तमी को विष्टि करण और सौभाग्य योग में 26:25 (अर्द्धरात्र्योत्तर दो बजकर पच्चीस मिनट) के लगभग समस्त सांसारिक सुख, समृद्धि, विवाह, परिवार सुख, कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि आदि के कारक शुक्र का अपने शत्रु ग्रह सूर्य की सिंह राशि में प्रस्थान होगा | इस प्रस्थान के समय शुक्र मघा नक्षत्र में होगा | यहाँ पाँच जुलाई को सिंह राशि में प्रविष्ट हो जाएगा | इस बीच 17 जुलाई  को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में तथा 29 जुलाई को उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में भ्रमण करता हुआ अन्त में एक अगस्त को 12:27 के लगभग कन्या राशि में प्रस्थान कर जाएगा | मघा नक्षत्र का स्वामी केतु है, पूर्वा फाल्गुनी का स्वामी स्वयं शुक्र ही है और उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का स्वामी सूर्य है | आइये जानने का प्रयास करते हैं कि प्रत्येक राशि के लिए शुक्र के सिंह में गोचर के सम्भावित परिणाम क्या रह सकते हैं…

मेष : शुक्र आपका द्वितीयेश और सप्तमेश होकर आपके पंचम भाव में गोचर कर रहा है | पारिवारिक तथा आर्थिक दृष्टि से यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है | परिवार में माँगलिक आयोजनों की सम्भावना है | Romantically कहीं Involve हैं तो सम्बन्धों में प्रगाढ़ता आने के साथ ही यह सम्बन्ध विवाह में भी परिणत हो सकता है | किन्तु यदि विवाहित हैं तो किसी भी बहस से बचने के लिए अपने Temperament को नियन्त्रित रखने की भी आवश्यकता है | आपकी सन्तान के लिए भी यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

वृषभ : आपका राश्यधिपति तथा षष्ठेश होकर शुक्र आपके चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है | उत्साह में वृद्धि का समय प्रतीत होता है | आप कोई नया वाहन अथवा घर खरीदने की योजना बना सकते हैं | घर को Renovate भी करा सकते हैं | किन्तु परिवार में किसी प्रकार के तनाव की भी समभावना है | महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है |

मिथुन : आपका पंचमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में हो रहा है | आपके तथा आपकी सन्तान की विदेश यात्राओं में भी वृद्धि हो सकती है | आपकी सन्तान उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए यदि कलाकार है तो कला के प्रदर्शन के लिए बाहर जा सकती है | यदि आपका कोई भाई अथवा बहन कहीं दूसरे देश अथवा शहर में हैं तो वापस आ सकते हैं |

कर्क : आपका चतुर्थेश और एकादशेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि से दूसरे भाव में हो रहा है | किसी महिला मित्र के माध्यम से आपको नवीन प्रोजेक्ट्स मिलने तथा अर्थलाभ की सम्भावना है | आपका व्यवसाय प्रॉपर्टी अथवा वाहन आदि की ख़रीद फ़रोख्त से सम्बन्धित है, अथवा आप कलाकार हैं तो आपके कार्य में उन्नति की सम्भावना है | नया घर अथवा नया वाहन भी खरीद सकते हैं | आपकी वाणी तथा व्यक्तित्व में निखार आने के साथ ही आपको किसी प्रकार का पुरूस्कार आदि भी प्राप्त हो सकता है |

सिंह : आपका तृतीयेश और दशमेश होकर शुक्र का गोचर आपकी राशि में ही हो रहा है | यदि आप दस्कार हैं, कलाकार हैं अथवा सौन्दर्य प्रसाधनों से सम्बन्धित कोई कार्य आपका है, या मीडिया से किसी प्रकार सम्बद्ध हैं तो आपके कार्य की प्रशंसा के साथ ही आपको कुछ नए प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त होने की सम्भावना है | इन प्रोजेक्ट्स के कारण आप बहुत दीर्घ समय तक व्यस्त रह सकते हैं तथा अर्थ लाभ कर सकते हैं |

कन्या : आपका द्वितीयेश और भाग्येश होकर शुक्र आपकी राशि से बारहवें भाव में गोचर कर रहा है | आर्थिक रूप से स्थिति में दृढ़ता आने के साथ ही आपके लिए कार्य से सम्बन्धित लम्बी विदेश यात्राओं के योग भी प्रतीत होते हैं | आपको महिला मित्रों के माध्यम से कुछ नवीन प्रोजेक्ट्स भी प्राप्त हो सकते हैं जिनके कारण आप बहुत समय तक व्यस्त रह सकते हैं | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि में वृद्धि हो सकती है |

तुला : लग्नेश और अष्टमेश होकर शुक्र आपकी राशि से लाभ स्थान में गोचर कर रहा है | कार्य क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से लाभ की सम्भावना है | आपको अचानक किसी ऐसे स्थान से कार्य का निमन्त्रण प्राप्त हो सकता है जिसके विषय में आपने कल्पना भी नहीं की होगी | यह प्रस्ताव आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है | किन्तु बॉस से किसी प्रकार का पंगा लेना आपके हित में नहीं रहेगा |

वृश्चिक : आपके लिए आपका सप्तमेश और द्वादशेश होकर शुक्र का गोचर आपके दशम भाव में हो रहा है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं में वृद्धि के संकेत हैं | आप अपने जीवन साथी के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा के लिए भी जा सकते हैं | किन्तु जीवन साथी के स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने की आवश्यकता है |

धनु : आपका षष्ठेश और एकादशेश आपकी राशि से नवम भाव में गोचर कर रहा है | यदि आपका कोई कोर्ट केस चल रहा है तो उसके अनुकूल दिशा में प्रगति की सम्भावना है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसमें आपको सफलता प्राप्त हो सकती है | कार्य की दृष्टि से यह गोचर उत्साहवर्द्धक प्रतीत होता है |

मकर : आपका योगकारक आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर कर रहा है | कार्य में किसी प्रकार का व्यवधान सम्भव है | कार्यस्थल में किसी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ सकता है | सन्तान के साथ किसी प्रकार की बहस सम्भव है अतः अपने Temperament को नियन्त्रण में रखना आवश्यक है | सन्तान के लिए यह गोचर अनुकूल प्रतीत होता है |

कुम्भ : आपका योगकारक शुक्र आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर कर रहा है | परिवार में माँगलिक आयोजन जैसे किसी का विवाह आदि हो सकते हैं जिनके कारण परिवार में उत्सव का वातावरण बन सकता है | साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में आपकी रूचि बढ़ सकती है | कार्य से सम्बन्धित यात्राओं के भी संकेत हैं | अविवाहित हैं अथवा प्रेम सम्बन्ध चल रहा है तो वह विवाह में परिणत हो सकता है | विवाहित हैं तो जीवन साथी के साथ सम्बन्धों में अन्तरंगता में वृद्धि के संकेत हैं |

मीन : आपके लिए तृतीयेश और अष्टमेश होकर शुक्र का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है | छोटे भाई बहनों के कारण किसी प्रकार का विवाद सम्भव है | यदि इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो बात कोर्ट तक भी पहुँच सकती है | साथ ही इसके कारण आपका तथा आपके भाई बहनों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है |

किन्तु ध्यान रहे, ये समस्त फल सामान्य हैं | व्यक्ति विशेष की कुण्डली का व्यापक अध्ययन करके ही किसी निश्चित परिणाम पर पहुँचा जा सकता है | अतः कुण्डली का विविध सूत्रों के आधार पर व्यापक अध्ययन कराने के लिए किसी Vedic Astrologer के पास ही जाना उचित रहेगा |

अन्त में, ग्रहों के गोचर अपने नियत समय पर होते ही रहते हैं – यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव मानव सहित समस्त प्रकृति पर पड़ता है | वास्तव में सबसे प्रमुख तो व्यक्ति का अपना कर्म होता है | तो, कर्मशील रहते हुए अपने लक्ष्य की ओर हम सभी अग्रसर रहें यही कामना है…

http://www.astrologerdrpurnimasharma.com/2018/07/04/venus-transit-in-leo/

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शुक्र

आज बात करते हैं समस्स्त प्रकार की भौतिक सुख सुविधाओं, कलाओं, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति, समाज में मान प्रतिष्ठा, प्रेम और रोमांस इत्यादि के कारण दैत्याचार्य शुक्र की | शुक्र का अर्थ होता है श्वेत, उज्जवल | दैत्य गुरु शुक्राचार्य का प्रतिनिधित्व करता है यह ग्रह | श्रीमद्देवीभागवत के अनुसार शुक्र कवि नामक एक ऋषि के वंशजों की अथर्वण शाखा के भार्गव ऋषि थे | कुछ कुछ स्त्रियों जैसे कोमल स्वभाव वाले आचार्य शुक्र ब्राह्मण ग्रह हैं | कथा उपलब्ध होती है कि ये अंगिरस ऋषि के पास विद्याध्ययन के लिए गए, किन्तु अंगिरस ऋषि अपने पुत्र बृहस्पति का पक्ष लेते थे, जो निश्चित रूप से शुक्र को नहीं भाता था | अतः वहाँ से वे गौतम ऋषि के पास चले गए | बाद में उन्होंने भगवान् शंकर की तपस्या करके उन्हें प्रसन्न किया और उनसे संजीवनी मन्त्र की शिक्षा ली | यह विद्या मृत व्यक्ति को भी जीवन देने में सक्षम थी | देवयानी इन्हीं की पुत्री थीं | इसी बीच इनकी माता का वध कर दिया गया क्योंकि उन्होंने कुछ दैत्यों को शरण दी थी | इस घटना से उन्हें विष्णु से घृणा हो गई और उन्होंने दैत्यों का गुरु बनना स्वीकार कर लिया | इधर इनकी पुत्री देवयानी का विवाह प्रस्ताव बृहस्पति के पुत्र कच ने ठुकरा दिया | महाभारत के अनुसार तब उसका विवाह ययाति के साथ हुआ जिनसे कुरु वंश उत्पन्न हुआ और शुक्राचार्य ने भीष्म का गुरु बनकर उन्हें राजनीति का ज्ञान कराया |

कुछ अन्य मतान्तर और रूपान्तर भी इस कथा में हैं, किन्तु यहाँ हम ज्योतिष के आधार पर शुक्र की बात कर रहे हैं | वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र धन सम्पत्ति का लाभ कराने वाला ग्रह माना जाता है | कला, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति तथा समाज में मान प्रतिष्ठा में वृद्धि कराने वाला ग्रह शुक्र को माना जाता है | जितनी भी प्रकार की विलासिता के साधन हैं उन सबका यह कारक ग्रह माना जाता है, तथा स्त्री पुरुष सम्बन्धों, प्रेम, रोमांस और प्रजनन का भी सम्बन्ध शुक्र के साथ माना जाता है | भरणी, पूर्वा फाल्गुनी तथा पूर्वाषाढ़ नक्षत्रों और वृषभ तथा तुला राशियों का स्वामित्व इसे प्राप्त है | मीन राशि में यह उच्च का तथा कन्या राशि में नीच का हो जाता है | बुध और शनि के साथ इसकी मित्रता है, सूर्य और चन्द्र के साथ शत्रुता है, तथा बृहस्पति के साथ यह तटस्थ भाव से रहता है | जल तत्व वाला यह ग्रह ज्येष्ठ मास तथा वसन्त ऋतु और दक्षिण-पूर्व दिशा का स्वामी है | इसकी दशा सबसे अधिक समय – बीस वर्षों तक – रहती है तथा लगभग एक माह यह एक राशि में संचार करता है, किन्तु वक्री, अस्त अथवा अतिचारी होने पर इस अवधि में कुछ दिनों का अन्तर भी हो सकता है |

शुक्र को बलि बनाने अथवा इसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए Vedic Astrologer कुछ मन्त्रों के जाप का सुझाव देते हैं | प्रस्तुत हैं उन्हीं में से कुछ मन्त्र…

वैदिक मन्त्र : ॐ अन्नात्परिश्रुतो रसं ब्रह्म्न्नाव्य पिबत् क्षत्रम्पयः सोमम्प्रजापति | ऋतेन सत्यमिन्द्रिय्वीपानं गुं शुक्रमन्धस्य इन्द्रस्य इन्द्रियम इदं पयोSमृतं मधु ||

पौराणिक मन्त्र : ॐ हिमकुन्द मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुं | सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् ||

अथवा दैत्यानां गुरु तद्वद्श्वेतवर्णः चतुर्भुजः | दण्डी च वरदः कार्यः साक्षसूत्रकमण्डलु: ||

तन्त्रोक्त मन्त्र : ॐ शुं शुक्राय नमः

बीज मन्त्र : ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नमः

गायत्री मन्त्र : ॐ भृगुसुताय विद्महे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो शुक्र: प्रचोदयात

अथवा – ॐ भृगुवंशजाताय विद्महे श्वेतवाहनाय धीमहि तन्नो कवि: प्रचोदयात्

अथवा – ॐ शुक्राय विद्महे शुक्लाम्बरधरः धीमहि तन्नो शुक्र: प्रचोदयात

समस्त प्रकार की भौतिक सुख सुविधाओं, कलाओं, शिल्प, सौन्दर्य, बौद्धिकता, राजनीति, समाज में मान प्रतिष्ठा, प्रेम और रोमांस इत्यादि के कारण दैत्याचार्य शुक्र सभी के सुख सौभाग्य में वृद्धि करे तथा सबका जीवन प्रेममय करे…

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